अन्तर्मन की पीड़ा

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दिल के रिश्ते जब हिसाब करते हैं,
हर दिन हर उत्सव उदास करते हैं।
समय की धारा जब विपरीत बहती,
तो आँखों से आँसू सवाल करते हैं॥
करूण वेदना से प्लावित दो ह्रदय,
अन्तर्मन की पीड़ा का जवाब भरते हैं।
अनसुलझे सम्बन्धों की गुत्थी को,
बार-बार सुलझाने का प्रयास करते हैं॥
समझ जाए यदि अन्तर्मन द्वन्द्व को साथी,
तो रिश्ते सवाल और जवाब नहीं करते हैं।
मिलन-बिछुड़न तो परिणति है प्रेम की,
बिछुड़े हुए रिश्ते बेवजह आवाज नहीं करते हैं॥
बसी है ह्रदय में सम्बन्धों की तस्वीर ऐसे,
जो राधे-कृष्ण की मूरत को साकार करते हैं।
अन्तर्मन की पीड़ा के दम्भ को समेटते हुए,
लफ्जों में सुरीली साज का इन्तजार करते हैं॥
धूमिल न हो प्रेम की पराकाष्ठा,
सदियों तक यही उम्मीद करते हैं।
अन्तर्मन के भावों से अभिव्यक्त चल,
‘शालू’ प्रेम की सुन्दर तस्वीर उकेरते हैं॥

                                                     #शालिनी साहू

परिचय : शालिनी साहू इस दुनिया में १५अगस्त १९९२ को आई हैं और उ.प्र. के ऊँचाहार(जिला रायबरेली)में रहती है। एमए(हिन्दी साहित्य और शिक्षाशास्त्र)के साथ ही नेट, बी.एड एवं शोध कार्य जारी है। बतौर शोधार्थी भी प्रकाशित साहित्य-‘उड़ना सिखा गया’,’तमाम यादें’आपकी उपलब्धि है। इंदिरा गांधी भाषा सम्मान आपको पुरस्कार मिला है तो,हिन्दी साहित्य में कानपुर विश्वविद्यालय में द्वितीय स्थान पाया है। आपको कविताएँ लिखना बहुत पसंद है।

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Sat Nov 18 , 2017
चूल्हा भी धू-धू करे, जलने के लिए। दिल भी शुकुर-शुकुर करे, धड़कने के लिए॥ पक्षी भी फुर्र-फुर्र करे, उड़ने के लिए। साँसें भी हुकुर-हुकुर करें, चलने के लिए॥ मेरा मन भी फुसुर-फुसुर करे, तुझे प्यार करने के लिए। आ गुटर-गूँ करें, दोनों मिलने के लिए॥           […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।