दिल के रिश्ते जब हिसाब करते हैं,
हर दिन हर उत्सव उदास करते हैं।
समय की धारा जब विपरीत बहती,
तो आँखों से आँसू सवाल करते हैं॥
करूण वेदना से प्लावित दो ह्रदय,
अन्तर्मन की पीड़ा का जवाब भरते हैं।
अनसुलझे सम्बन्धों की गुत्थी को,
बार-बार सुलझाने का प्रयास करते हैं॥
समझ जाए यदि अन्तर्मन द्वन्द्व को साथी,
तो रिश्ते सवाल और जवाब नहीं करते हैं।
मिलन-बिछुड़न तो परिणति है प्रेम की,
बिछुड़े हुए रिश्ते बेवजह आवाज नहीं करते हैं॥
बसी है ह्रदय में सम्बन्धों की तस्वीर ऐसे,
जो राधे-कृष्ण की मूरत को साकार करते हैं।
अन्तर्मन की पीड़ा के दम्भ को समेटते हुए,
लफ्जों में सुरीली साज का इन्तजार करते हैं॥
धूमिल न हो प्रेम की पराकाष्ठा,
सदियों तक यही उम्मीद करते हैं।
अन्तर्मन के भावों से अभिव्यक्त चल,
‘शालू’ प्रेम की सुन्दर तस्वीर उकेरते हैं॥
#शालिनी साहू
परिचय : शालिनी साहू इस दुनिया में १५अगस्त १९९२ को आई हैं और उ.प्र. के ऊँचाहार(जिला रायबरेली)में रहती है। एमए(हिन्दी साहित्य और शिक्षाशास्त्र)के साथ ही नेट, बी.एड एवं शोध कार्य जारी है। बतौर शोधार्थी भी प्रकाशित साहित्य-‘उड़ना सिखा गया’,’तमाम यादें’आपकी उपलब्धि है। इंदिरा गांधी भाषा सम्मान आपको पुरस्कार मिला है तो,हिन्दी साहित्य में कानपुर विश्वविद्यालय में द्वितीय स्थान पाया है। आपको कविताएँ लिखना बहुत पसंद है।