प्रकाश पर्व

keshav
प्रकाश पर्व का अभिनन्दन,
सबका ज्योतिर्मय हो अंतर्मन।
हम सब मिलकर दीप जलाएं,
इस धरा से अंधेरा दूर भगाएं।

शुद्ध करें निज मन मन्दिर को,
छोड़ें व्याप्त क्रोध-अनल को
त्यागें मन से लालच-विष को।

विश्वात्म बनें! आत्म मिटाकर,
परमात्म बनें! `मैं` को त्यागकर।

ज्योति पर्व की इस बेला में,
मन का आंगन आलोकित हो।
दीपक जले हर एक दिल में,
सबका तन-मन प्रफुल्लित हो।

पग-पग स्नेह का दीप जले,
लौ से सबका अंधियारा मिटे।

मन का अंधेरा चलें मिटाने को,
फैलाकर अपनी बंधी सीमाओं को।
अपनेपन का सबको अहसास दिलाएँ,
मन के बैर भाव को जड़ से मिटाएँ।

क्योंकि,
अंधकार में जब डूबा हो पड़ोसी,
तो हम अपना घर कैसे सजाएँ।
इसलिए,
भेदभाव,ऊँच-नीच की दीवार ढहाकर,
हम सब मिल-जुलकर पग बढ़ाएँ।

सबको समर्पित ये दीपमालिका,
और श्रृंगारित ज्योतिर्मय तन-मन।
नवल ज्योति से नवप्रकाश हो,
चहुँदिशा यश,वैभव,सुख बरसे।

केशव की ये प्रार्थना,उपजे ज्ञान प्रकाशl
प्रकाश के इस पर्व में,हो सबमें उल्लासll

                                                               #केशव कुमार मिश्रा

परिचय: युवा कवि केशव के रुप में केशव कुमार मिश्रा बिहार के सिंगिया गोठ(जिला मधुबनी)में रहते हैं। आपका दरभंगा में अस्थाई निवास है। आप पेशे से अधिवक्ता हैं।

matruadmin

Next Post

माननीयों का `अबाधित` महाभारत ...!!

Sat Oct 28 , 2017
 फिल्मी `दंगल` के कोलाहल से काफी पहले बचपन में सचमुच के अनेक दंगल देखे। क्या दिलचस्प नजारा होता था। नागपंचमी या जन्माष्टमी जैसे त्योहारों पर मैदान में गाजे-बाजे के बीच झुंड में पहलवान घूम-घूमकर अपना जोड़ खोजते थे। किसी ने चुनौती दी तो हाथ मिलाकर हंसते-हंसते चुनौती स्वीकार किया। फिर […]
tarkesh ojha

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।