सशक्त नारी

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sandeep bhatt
चौकी-चूल्हा छोड़ चली है देखो अब भारत की नारी।
देशहित में रण में पहुँची है अब भारत की ये नारी॥
बन रानी झांसी की देखो कहर अपना बरपाएगी।
कल तक शबनम थी देखो,आज शोला बन झुलसाएगी॥
चली है रण में लिए हौंसला,जलवा नया दिखाएगी।
प्रहरी-रक्षक बन ये,अपने लाज वतन की बचाएगी॥
फौलादी मंसूबों को लेकर,बैरी को नोच खाएगी।
चतुरंगिणी सेना में चक्रव्यूह बनाएगी॥
लिए ध्वजा को हाथ में,हाडा रानी कहलाएगी।
निज प्राणों की छोड़ फिकर,छठी का दूध याद कराएगी॥
कल की अबला, सैन्य बल में जंग फतह कर आएगी।
स्याह सुनहरी से, ये सैनिक ‘शौर्य’ गाथा लिख पाएगी॥
चामुंडा का रूप ये अबला,नाम अमर कर जाएगी।
अबला नहीं हैं,अब है सबला,साबित कर दिखाएगी॥
                                                                              #संदीप भट्ट ‘शौर्य’
परिचय : व्यवसाय से वकील संदीप भट्ट ‘शौर्य’ लिखने का खासा शौक रखते हैं। राजस्थान के डूंगरपुर में आपका निवास है। यही जन्म स्थान तथा जन्मतिथि १६ मई १९८२ है। बीएएलएलबी तक शिक्षा हासिल करके डूंगरपुर में ही वकालत करते हैं। उपलब्धि यही है कि,नवोदित रचनाकार के रूप काव्य गोष्ठी में शामिल होते रहते हैं। एक मंच पर सम्मान भी मिला है। लेखन का उद्देश्य-जनचेतना, और मन के भावों का संदेश अन्य तक पंहुचाना है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।