एक मुकम्मल ग़ज़ल….

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avinash amethiya
पिया के नाम को अपने हथेली में रचाती है,
पिया को हर घड़ी अपने हृदय में वो बसाती है।
सुना है प्यार से जिसके सजन जी प्यार हैं करते,
उसी  के हाथ  में हिना भी अपना  रंग लाती है।
अजब-सी एक हलचल फिर हमारी साँस में उठती,
बुलाकर  पास वो अपने  गले से  जब लगाती है।
यहाँ  हम  एक-दूजे  से  बसे  हैं दूर, अब कैसे?
धड़कते दिल की हर धड़कन, धड़ककर के बताती है।
गरीबों का भला अब-तक सियासत कर नहीं पाई,
सियासी  फायदे  की खातिर  हमें हमसे लड़ाती है।
अजब-सी ये कहानी है सुनो ‘अविनाश’ चाहत की,
जिसे अक्सर तुम्हारी साँस, धड़कन को सुनाती है।
                                                                    #अविनाश सिंह अमेठिया
परिचय : अविनाश सिंह अमेठिया की  जन्मतिथि-२२ मई १९९३ एवं जन्म स्थान-रांची है। शिक्षा-स्नातक और आपका कार्यक्षेत्र-कोल इंडिया है। सामाजिक क्षेत्र में आप साहित्य सेवा के अन्तर्गत विधा श्रृंगार तथा ओज में लेखन करते हैं। देवरिया में आपका निवास है। सम्मान में अब तक मुक्तक मणि, मानस मणि प्राप्त है। आपके लेखन का उद्देश्य-साहित्य सेवा है और बचपन का शौक भी पूरा करना है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।