टूट गई है मेरी हिम्मत,
पस्त हो गया हौंसला।
कितनी मुश्किल से जोड़कर,
बुना था एक घोंसला।
ख्वाब का ताना-बाना बुनकर,
खड़ा किया एक आशियाना।
जिंदगी के इम्तिहान ने,
कर दिया चकनाचूर लेकिन,
मैं भी लाचार और बेबस नहीं।
कर लो चाहे जितना भी मजबूर,
मैं गिरूंगा उठूंगा,फिर सम्भलूंगा।
जोड़ अपने मजबूत इरादों को,
फिर बुनूंगा एक घोंसला।
तोड़ नहीं सकता अब कोई,
मेरा मजबूत हौंसला॥
#प्रणिता सेठिया ‘परी’
परिचय : प्रणिता राकेश सेठिया का लेखन में उपनाम ‘परी’ है। आप
रायपुर(छत्तीसगढ़)में रहती हैं। लेख,कविता,गीत,नाटिका,लघुकथा,
कहानी,हाइकु,तुकांत-अतुकांत आदि रचती हैं। आपकी साहित्यिक उपलब्धि यही है कि,कई सामाजिक पत्रिकाओं तथा समाचार पत्रों में रचनाएं प्रकाशित होती हैं। शतकवीर सम्मान,महफ़िल-ए-ग़ज़ल और काव्य भूषण सम्मान से अलंकृत हो चुकी हैं। हाइकु रचनाकारों की किताब में आपकी रचना भी जल्दी ही प्रकाशित होगी। अन्य उपलब्धि में उच्च १० उद्यमी महिलाओं में आप चौथे क्रम पर रहीं हैं। प्रणिता राकेश सेठिया ‘परी’ ने उत्कृष्ट समाजसेवा के लिए कई बार सम्मान पाया है।
Mon Aug 21 , 2017
बंधन प्यार का स्वीकार कीजिए, एक दूजे को सदा प्यार कीजिए। छोड़ो भी जाति धर्म की लड़ाई, किसी का न तिरस्कार कीजिए। वंदन दिलों के रिश्ते दिलों से जोड़ लो, न टूटे भरोसा ऐतबार कीजिए। मान करो सदा सम्मान करो, इज्जत न किसी की तार-तार कीजिए। बिखेर कर खुशियां बनी […]