हे भारतीय राजनीति के कलंकों…

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ganga
हे भारतीय राजनीति के
कलंकों,
अब तो देश को बख्श दो,
आज़ादी से आज तक देश
को छला,
अब तो कुछ उत्थान हो जाने
दो।
अपनीकुर्सी न जाए तुम चलते
हो गंदी चालें,
कभी जाति,
कभी धर्म,
कभी भाषा की
खड़ी करते हो दीवारें,
आज भी देश ढो रहा है
आरक्षण का कोढ़,
कभी दलित,
कहीं अल्पसंख्यक
का मचाते हो शोर,
अरे हर जाति,
हर धर्म मे हैं
गरीब,भूखे-प्यासे,
सिर्फ गरीबी को ही
क्यों सुविधाओं का
आधार तुम नहीं बनाते।
डरते हो ,
फिर कहां बचेगी
तुम्हारी दोगली राजनीति,
सोचते हो फिर किसको
छलोगे मीत ?????
                                                                #गंगा प्रसाद पांडे ‘भावुक’
 परिचय : गंगा प्रसाद पांडे ‘भावुक’ का जन्म स्थान उत्तरप्रदेश में ग्राम समनाभार कटरा (जिला सुल्तानपुर)है। आप स्थाई रुप से उत्तरप्रदेश के शिवनगर भंगवा  (जिला प्रतापगढ़) के हैं। शिक्षा बी.एस-सी.,एमए तथा बी.एड. है। लेखन विधा अतुकांत,हाइकु अधिक पसंद है। सामाजिक विसंगतियों पर ही लेखन करते हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।