नेह निमंत्रण…

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या कह दो कि नहीं है प्यार।
नेह निमंत्रण प्रियवर बोलो,
है स्वीकृत या अस्वीकार॥
प्यार करो तो करो……।
मचल मचलकर दिल रह जाए,
दूरी क्षण भर सही न सही जाए!
और परीक्षा कितनी होगी,
दारुणदुख प्रिय कितने दोगी?
सीधे-सीधे हमसे कह दो,
रास न आया मेरा प्यार॥
नेह निमंत्रण प्रियवर बोलो….।
पुष्प प्रीति के मीत न मसलो,
वचनवद्ध हो बात न बदलो।
पीर बिरह की क्यों कर देते,
खुलकर हमसे ही कह देते॥
दुविधाओं की कैद तोड़कर,
दूर करो मन का अंधियार।
नेह निमंत्रण प्रियवर बोलो……।
देखें कब तक राह तुम्हारी?
उजड़ रही मन की फुलवारी।
तक-तक नैना भी पथराए,
कहीं उमरिया बीत न जाए॥
रग-रग में बसी है प्रीति तुम्हारी,
तुम्हीं को करना है उपचार।
नेह निमंत्रण प्रियवर बोलो,
है स्वीकृत या अस्वीकार॥
                                                                  #आर.पी.सारंग एडवोकेट

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