बुढ़ापा…

sunil khinchi
सांझ के रवि की तरह ढलकर मैं सो गया हूं।
लगता है जैसे अब मैं बूढा हो गया हूं॥
तन का उत्साह भी खत्म-सा होने लगा है।
मन पुष्प फिर से बचपन बीज बोने लगा है॥
नयनों का प्रकाश भी अब हो कम-सा गया है।
सांसों का सैलाब भी अब थम-सा गया है॥
भूख-प्यास भी नहीं लगती अब पहले की तरह।
हाल मन अब हो गया है मेरा कुछ इस तरह॥
जीभ दांतों ने भी अब मेरा साथ छोड़ दिया।
जवानी की हवा ने भी मुझसे मुंह मोड़ लिया॥
भोजन खाने-पीने में दर्द पाने लगा हूं।
दूध में दलिया घोलकर अब खाने लगा हूं॥
लगे जैसे कान भी अब बहरे हो गए हैं।
गालों में भी गड्डे अब गहरे हो गए हैं॥
जवानी वाला गुस्सा व किस्सा गुम हो गया।
इशारे समझाने का असर भी कम हो गया॥
वक्त के साथ साथ मेरी उमर ढल-सी गई है।
जवानी की मौज-मस्ती अब मर-सी गई है॥
अब खुद की गलतियों को खुद ही गिनने लगता हूं।
सोचता हूं अतीत को तो, मन में मरने लगता हूं॥
मान लिया एक दिन चले जाना है छोड़कर।
राम प्यारा हो जाना है सबसे मुंह मोड़कर॥
अनुभवों के पन्ने पलटते मैं खो गया हूं।
लगता है जैसे अब मैं बूढ़ा हो गया हूं॥
                                                                                                         #सुनील खींची
परिचय : सुनील खींची काव्य पाठ भी करते हैं।आपकी शैक्षिक योग्यता बीएड और स्नातकोत्तर(अंग्रेजी साहित्य) है। निवासी खेड़ली रेल (जिला-अलवर, राजस्थान) में है।

matruadmin

Next Post

हिन्दी प्रान्तों के लोग भी अगर हिन्दी को अपना लें तो...

Fri Jul 14 , 2017
हिन्दी प्रान्तों के लोग भी अगर हिन्दी को अपना लें तो इसे किसी अन्य भाषा-भाषी का मुखापेक्षी होने की ज़रूरत नहीं है। दुनिया की जनसंख्या में हिन्दी-भाषियों की संख्या बहुत बड़ी है,पर समस्या यह है कि अपने ही घर में हिन्दी जलावतन हो गई है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण है उत्तर प्रदेश के […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।