माँ

2
0 0
Read Time1 Minute, 36 Second
vishwas
पास आता ही नहीं गोदी में खिलाया जिसको,
नज़र से कैसे करूँ दूर है बनाया जिसकोl
साथ चलने में भी आती है अब उसको शर्म,
सहारे उंगली के चलना है सिखाया जिसकोl
हाथ से पानी भी वो मुझको पिला नहीं सकता,
दूध सीने का मैंने है पिलाया जिसकोl
रात कट गई सीत की आंखों में,
हाल लेता ही नहीं आँचल है उड़ाया जिसकोl
बच्चे तेरे भी हैं ए लाल संभाल लेना उन्हें,
खुदा ये दिन कभी भी न दिखाए तुझकोl
                                                                         #विश्वास कुमार
परिचय : विश्वास कुमार का जन्म 1998 में हरियाणा का है। शिक्षा 12 वीं तक प्राप्त की और बचपन से ही रंगमंच करने के अभ्यास को और बढ़ाया। भारतेन्दु नाट्य अकादमी (लखनऊ) और क्रिएटिव उत्तराखंड द्वारा भी सम्मानित हैं। समाज की कुप्रथा पर खुद के लिखे हुए कई किस्सों पर  नुक्कड़ नाटक के साथ ही मंचन भी किया। इन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा देल्ही घराने से ली है। 3 साल की उम्र से ही रुद्रपुर(उत्तराखंड) में रहते हैं। रुद्रपुर की स्थानीय पत्रिकाओं और अखबारों में रचनाएं छपती रहती हैं। आपको सारस्वत सम्मान भी दिया  गया है।

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

2 thoughts on “माँ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

भरोसा

Thu Jun 22 , 2017
ज़रा पाने की चाहत में,बहुत कुछ छूट जाता है, न जाने सब्र का धागा कहाँ पर छूट जाता हैl किसे हमराह कहते हो,यहां तो अपना साया भी, कहीं पर साथ रहता है,कहीं पर छूट जाता हैl ग़नीमत है नगर वालों,लुटेरों से लुटे हो तुम, हमें तो गांव में अक्सर,दरोगा लूट […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।