पास आता ही नहीं गोदी में खिलाया जिसको,
नज़र से कैसे करूँ दूर है बनाया जिसकोl
साथ चलने में भी आती है अब उसको शर्म,
सहारे उंगली के चलना है सिखाया जिसकोl
हाथ से पानी भी वो मुझको पिला नहीं सकता,
दूध सीने का मैंने है पिलाया जिसकोl
रात कट गई सीत की आंखों में,
हाल लेता ही नहीं आँचल है उड़ाया जिसकोl
बच्चे तेरे भी हैं ए लाल संभाल लेना उन्हें,
खुदा ये दिन कभी भी न दिखाए तुझकोl
#विश्वास कुमार
परिचय : विश्वास कुमार का जन्म 1998 में हरियाणा का है। शिक्षा 12 वीं तक प्राप्त की और बचपन से ही रंगमंच करने के अभ्यास को और बढ़ाया। भारतेन्दु नाट्य अकादमी (लखनऊ) और क्रिएटिव उत्तराखंड द्वारा भी सम्मानित हैं। समाज की कुप्रथा पर खुद के लिखे हुए कई किस्सों पर नुक्कड़ नाटक के साथ ही मंचन भी किया। इन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा देल्ही घराने से ली है। 3 साल की उम्र से ही रुद्रपुर(उत्तराखंड) में रहते हैं। रुद्रपुर की स्थानीय पत्रिकाओं और अखबारों में रचनाएं छपती रहती हैं। आपको सारस्वत सम्मान भी दिया गया है।
विश्वास भाई तुम बहुत आगे तक जाओगे इतना में जानती हूँ।
Bahut hi sundar rashanaa. Badhaai.