मनोज श्रीवास्तव व डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय को मिलेगा वर्ष 2024 का हिन्दी गौरव अलंकरण

0 0
Read Time3 Minute, 43 Second

25 फ़रवरी को इन्दौर में आयोजित समारोह में होंगे अलंकृत

इंदौर । हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा वर्ष 2024 का हिन्दी गौरव अलंकरण आईएएस मनोज श्रीवास्तव (भोपाल) और डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय (मुम्बई) को प्रदान किया जाएगा। यह समारोह 25 फ़रवरी को इंदौर में आयोजित होगा एवं इसमें विभूतियों को अलंकृत किया जाएगा।

संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने बताया कि ‘अलंकरण का यह पाँचवा वर्ष है। हिन्दी के प्रचार और विस्तार के लिए ‘मातृभाषा उन्नयन संस्थान’ द्वारा प्रतिवर्ष दो हिन्दी साधकों को ‘हिन्दी गौरव अलंकरण’ से विभूषित किया जाता है। चयन समिति द्वारा चयनित वर्ष 2024 के लिए आईएएस मनोज श्रीवास्तव जी व डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय जी के हिन्दी के प्रति समग्र अवदान को रेखांकित करते हुए हिन्दी गौरव अलंकरण प्रदान किया जाएगा।’

ख़्यात साहित्यकार व लोक सेवक मनोज श्रीवास्तव जी वर्तमान में सुप्रसिद्ध हिन्दी पत्रिका अक्षरा के संपादक हैं और आप आईएएस की पढ़ाई भी हिन्दी में करके हिन्दी से आईएएस चुने गए थे। आपकी लगभग 35 से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं।

सुप्रसिद्ध साहित्यकार व वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. (डॉ.) करुणाशंकर उपाध्याय जी वर्तमान में मुम्बई विश्वविद्यालय में प्राध्यापक हैं। साथ ही कई पुस्तकों के लेखक भी हैं व आपके ही शोध कार्य के कारण हिन्दी को विश्व की सबसे बड़ी भाषा के रूप में मान्यता भी मिली है।

संस्थान द्वारा वर्ष 2020 में पद्मश्री अभय छजलानी एवं वरिष्ठ कवि राजकुमार कुम्भज को, वर्ष 2021 में वरिष्ठ साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत व साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे को, वर्ष 2022 में कहानीकार डॉ. कृष्णा अग्निहोत्री व वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण कुमार अष्ठाना को एवं वर्ष 2023 में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. भगवती लाल राजपुरोहित व सुप्रसिद्ध मीडिया शिक्षक प्रो. (डॉ) संजय द्विवेदी को अलंकृत किया जा चुका है।

अलंकृत होने वाली विभूतियों को हिन्दीगौरव अलंकरण चयन समिति के राजकुमार कुम्भज व प्रो. संजय द्विवेदी, मातृभाषा उन्नयन संस्थान की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. नीना जोशी, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष शिखा जैन, राष्ट्रीय सचिव गणतंत्र ओजस्वी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य नितेश गुप्ता, भावना शर्मा, सपन जैन काकड़ीवाला, प्रेम मंगल आदि ने शुभकामनाएँ दीं।

matruadmin

Next Post

राघव रंग में डूबा भारतीय गणतंत्र

Thu Jan 25 , 2024
26 जनवरी गणतंत्र दिवस विशेष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ अरुण की लालिमा फैलने लगी, दसों दिशाओं में भारत की गूंज उठने लगी, वैश्विक रूप से मज़बूत होता भारत अमृत काल की अमृत बेला का नेतृत्व करने लगा, विश्व में भारत भारती का जयघोष होने लगा, क्या अमरीका, क्या ब्रिटेन, सभी राष्ट्राध्यक्ष अब केवल […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।