प्रेम प्यार की वो पुजारन
अंखियों की वे नूर,
ले आया था भर मांग उनकी
‘एक चुटकी सिन्दूर’।
आने से महक उठा था
देखो घर-आँगन,
जीत लिया था उसने,
सबका देखो मन,
श्रृंगारित हो ललचाती मुझको,
हंसमुख सुहागन,
हम सबको नाज था उस पर
देखो भरपूर,
ले आया था भर मांग उनकी
एक चुटकी सिन्दूर।
सहनशीलता की मिसाल,
हृदय था उसका विशाल,
परिवार की थी वो ढाल,
थी भोली बहुत ही,
समझ न सकी उसकी चाल
फेंक चुका था पाश,
खड़ा हो गया था ले जाने
देखो निर्दयी काल
अभिनन्दन कर उसका बोली-
स्वागत तेरा मेरे आँगन
चलने को तैयार खड़ी,
पतिव्रता ये सुहागन
हर पल साथ मेरे,
रहेंगी वो जरूर,
अंतिम सफर में भी
भरवा लिया माँग में
फिर,
एक चुटकी सिन्दूर।
अंतिम सफर भी उसका
था बहुत शानदार,
सम्मिलित थे यात्रा में उसकी
सामान्य और असरदार
मुक्तिधाम पर पँहुच उसने
कह दिया मुझसे,
-प्रियवर,
तुम पर है मुझको बहुत गरुर
बन सुहागन पा गई,
ले ‘एक चुटकी सिन्दूर।’
#सुनील चौरे ‘उपमन्यु’
परिचय : कक्षा 8 वीं से ही लेखन कर रहे सुनील चौरे साहित्यिक जगत में ‘उपमन्यु’ नाम से पहचान रखते हैं। इस अनवरत यात्रा में ‘मेरी परछाईयां सच की’ काव्य संग्रह हिन्दी में अलीगढ़ से और व्यंग्य संग्रह ‘गधा जब बोल उठा’ जयपुर से,बाल कहानी संग्रह ‘राख का दारोगा’ जयपुर से तथा
बाल कविता संग्रह भी जयपुर से ही प्रकाशित हुआ है। एक कविता संग्रह हिन्दी में ही प्रकाशन की तैयारी में है।
लोकभाषा निमाड़ी में ‘बेताल का प्रश्न’ व्यंग्य संग्रह आ चुका है तो,निमाड़ी काव्य काव्य संग्रह स्थानीय स्तर पर प्रकाशित है। आप खंडवा में रहते हैं। आडियो कैसेट,विभिन्न टी.वी. चैनल पर आपके कार्यक्रम प्रसारित होते रहते हैं। साथ ही अखिल भारतीय मंचों पर भी काव्य पाठ के अनुभवी हैं। परिचर्चा भी आयोजित कराते रहे हैं तो अभिनय में नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से साक्षरता अभियान हेतु कार्य किया है। आप वैवाहिक जीवन के बाद अपने लेखन के मुकाम की वजह अपनी पत्नी को ही मानते हैं। जीवन संगिनी को ब्रेस्ट केन्सर से खो चुके श्री चौरे को साहित्य-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में वे ही अग्रणी करती थी।
Mon Jun 12 , 2017
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