डॉ. अरविंद त्यागी भाषा सारथी सम्मान से सम्मानित

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दिल्ली । हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए प्रतिबद्धता से कार्यरत संस्थान मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा गंतव्य संस्थान के संस्थापक एवं हिन्दी सेवी डॉ. अरविंद त्यागी को भाषा सारथी सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान संस्थान की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य भावना शर्मा द्वारा दिया गया।

ज्ञात हो कि डॉ. त्यागी कई संस्थानों में प्रमुख पदों पर रहते हुए हिन्दी भाषा की सेवा कर रहे हैं। आप सामाजिक मुद्दों और सरोकारों की लड़ाई भी लड़ते हैं, इसी विषयक हज़ार किमी की पदयात्रा भी आपके नाम दर्ज है।
‘सबको शिक्षा-सबको काम’ की माँग की मुहिम डॉ. त्यागी की अगुवाई में चलाई गई थी, जिसमें एक करोड़ लोगों के हस्ताक्षर करवा कर माँग पत्र तत्कालीन राष्ट्रपति को सौंपा था। वर्तमान में डॉ. अरविंद त्यागी पर्यावरण, भाषा, साहित्य, भ्रूण हत्या के विरुद्ध आवाज़, जल संरक्षण जैसे मुद्दों के लिए लगातार लड़ाई लड़ रहे हैं।

भाषा सारथी सम्मान से सम्मानित होने पर मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’, उपाध्यक्ष डॉ. नीना जोशी, सचिव गणतंत्र ओजस्वी, कोषाध्यक्ष शिखा जैन सहित कार्यकारिणी सदस्य नितेश गुप्ता, सपन जैन काकड़ीवाला आदि ने शुभकामनाएँ प्रेषित कर अभिनन्दन किया।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।