मेरे कन्हैया प्रभु

0 0
Read Time1 Minute, 9 Second

मेरे मन में बस जाओ कन्हैया मेरे,
सुबह उठते ही तुम्हें मै निहारा करूं।

चराते हो जो गईया मधुबन में प्रभु
उन गाईयो का मैं नित्य दुग्ध पान करू।

बजाते हो बंसी जो यमुना तट पर
उस बंसी की तान में रोज श्रवण करू।

खाते हो जो माखन मिश्री प्रभु तुम,
उस माखन को मैं रोज तैयार करूं।

खेलते हो जिस गेंद से प्रभु तुम,
उस गेंद को रोज मै उछाला करूं।

क्रीड़ा करते हो जो नंद यशोदा के आंगन में,
उस क्रीड़ा को मैं नित्य निहारा करू।

रचाते हो रास जो गोपियों के संग प्रभु ,
उस रास को अपने नेत्रों से निहारा करूं।

दिए हैं उपदेश गीता में प्रभु तुमने
उन उपदेशों को जीवन में उतारा करू।

किये हैं बहुत कार्यकलाप प्रभु तुमने,
रस्तोगी उन सबको भक्तो को सुनाया करू।

रामकृष्ण रस्तोगी
गुरुग्राम

matruadmin

Next Post

क्या समझते है…

Sat Jul 10 , 2021
मेहनत लगन और निष्ठा का फल क्या मुझे मिलेगा। बनाया है जो आशियाना क्या उसमें रहने को मिलेगा। या ये भी एक यादगार और स्मारक बनकर खड़ा रहेगा। जो मोहब्बत की कहानी को अपने अंदाज में कहेगा।। महफ़िल में रंग हम जमाते थे। जब वो हमारे साथ होते थे। हम […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।