संस्था व्यंग्यम् का “फाग फुहार” काव्य सम्मेलन संपन्न

संस्था व्यंग्यम् के तत्वावधान में होली के अवसर पर वार्षिक कार्यक्रम ऑनलाइन काव्य सम्मेलन “फाग फुहार” का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की शुरुआत कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे रंजीत सारथी ने सरस्वती वंदना से की । कवि सम्मेलन में रचनाकारों ने सस्वर काव्य पाठ कर होली के अवसर पर रंग भरी प्रस्तुतियाँ दी । सभी की रचनाएं एक से बढ़कर एक गीत, मुक्तक, मुक्त छंद, छंद युक्त कविताओं ने गोष्ठी को यादगार बना दिया । काव्य पाठ में संस्था के संरक्षक डॉ सपन सिन्हा ने होली की शुभकामनाएं अपनी रचना से कुछ इस तरह दी
” यार मेरे तो मुस्कुरा ले इस बरस की होली में”

संस्था अध्यक्ष अनिता मंदिलवार सपना ने गीत
की प्रस्तुति दी
“ये सुहानी ऋतु फागुन की, सरसी धरती छवि छाने लगी”
इसके बाद पूनम दुबे ने कविता प्रस्तुत की “छोड़ो छोड़़ो मुझको सावरियाँ
ऐसे ना भिगो मोरी चुनरियाँ”

पिछली होली की याद करते हुए आयशा अहमद ने अपनी रचना प्रस्तुत की
” पिछली होली तुम्हारा आना अच्छा लगा”

इसके बाद संस्था के संयोजक राजेंद्र सिंह “अभिन्न” ने समसामयिक क्षणिकाएँ प्रस्तुत की
“बागान के मजदूर बहुत खास होते हैं जब चुनाव पास आते हैं ”
डॉ नीरज वर्मा ने सम सामयिक रचना प्रस्तुत की और कहा
“आओ थोड़ा अपने घर की बात करें”

आशा पांडे जी ने अपने मन की कुछ बात को कुछ इस तरह से होली के बारे में बताया कि
“मैं भी खेलूँ पिया संग होली बरसाने में”

राजेश पांडेय जी ने अपनी रचना बसंती अंदाज में प्रस्तुत किया
“मस्त मलंगी मन हुआ बासंती अंदाज”
अजय चतुर्वेदी जी ने रचना प्रस्तुत की
“आने वाला होली का पर्व दूध सा उज्जवल हो गंगा सा निर्मल हो”
गीता द्विवेदी ने अपनी रचना प्रस्तुत की
“आयल भादो अष्टमी बदली की छांव में अईहा हो कन्हैया अबकी फागुन हमरा गांव में”
“संस्था सचिव पूनम पांडेय ने होली को कुछ इस तरह से कहा “होली खेले नंद किशोर” और
महिला संगठन प्रभारी अर्चना पाठक निरन्तर ने कहा होली में फाग फुहार की बात जरूर होनी चाहिए
कोषाध्यक्ष राजलक्ष्मी पांडेय ने कहा कि
सतरंगी रंगों को लेकर, आया फाग फुहार । अपनो का यह साथ अनूठा, भरे दिलों में प्यार । और रंजीत सारथी जी ने बहुत ही सुंदर रचना से समापन किया
“होली खेले हम जोली”
कार्यक्रम के अंत मे अनिता मंदिलवार सपना ने सभी की रचनाओं की दो पंक्तियों को त्वरित काव्यमय आशु सृजन प्रस्तुत किया ।

कार्यक्रम का सफल संचालन राजलक्ष्मी पांडेय और अर्चना पाठक निरंतर ने किया ।ऑनलाइन काव्य सम्मेलन का सफल तकनीकी संचालन संस्था के उपाध्यक्ष इं• विशाल वर्मा ने किया । कार्यक्रम , कार्यक्रम प्रभारी गिरीश गुप्ता और ब्लाक अध्यक्ष अंचल सिन्हा के मार्गदर्शन में सफलता से संपन्न हुआ और कवि सम्मेलन में उपस्थित रहे अनंग पाल दीक्षित, राज नारायण द्विवेदी, वंदना दत्ता, सत्यजीत श्रेष्ठ, अंचल सिन्हा, सौरभ वाजपेयी, राजेंद्र विश्वकर्मा, राम लाल विश्वकर्मा, मधु गुप्ता, नीलम सोनी, लता नायर, आप सभी की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया ।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।