मोहब्बत के लिए….

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तेरा मेरा नाम आजकल
जुबा पर लोगों के रहता है।
मोहब्बत के चर्चे भी
दोनों के बहुत होते है।
मोहब्बत कहते है किसे
उदाहरण हमदोनों के देते है।
और अपनी मोहब्बत को
हमारे नामो से जोड़ते है।।

मोहब्बत की कश्ती को
तैयराना आसान नहीं होता।
मोहब्बत कश्ती है तो
हम दोनों इसकी पतवारे है।
जो एक दूसरे के बिना
कश्ती को चला सकते नहीं।
इसलिए दोनों का साथ-2
होना अति आवश्यक है।।

मोहब्बत में त्याग समर्पण
और भावनाओं का होना।
मोहब्बत को जिंदा रखने
के लिए बहुत जरूरी है।
जो इनका आदर नहीं करता
वो मोहब्बत कर नहीं सकता।
इसलिए तो आजकल की
मोहब्बते परवान नहीं चड़ाती।।

जय जिनेंद्र देव
संजय जैन (मुंबई)

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