बसन्त का वन्दन

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वह गीत है
जिसमें लगी है सभी की प्रीत
आते ही जिसके
खिल जाते हैं कोमल पुष्प
महक उठते हैं उपवन
झूम उठते हैं सभी के मन
मौसम-
बन जाता है सुहावना
नूतन सौन्दर्य छा जाता है चहुं ओर
कई तरह के सतरंगी पुष्प खिलकर
बढ़ाते हैं शोभा
बगीचों की और-
आकर्षित करते हैं
अपनी ओर मधुकरों को-
खिल-खिलाकर हंस पड़ती है
सरसों-
मधुआ के गेहूं के खेत में
बोलती हैं कोयलें
हरिया के आम्रमंजरी से
झूंमते बाग में
ते कहीं निकल पड़ते हैं
मस्तानों के झुण्ड
पीताम्बर डाले गीत गुनगुनाते
मादकता सरसता के मोहक
ऋतुराज के स्वागत
अभिनंदन को।
बसन्त के वंदन को !!
शशांक मिश्र भारती
बड़ागांव (शाहजहांपुर)

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काल

Fri Feb 12 , 2021
जीवन के है तीन आधार भूत भविष्य और वर्तमान। जीना सबको पड़ता है इन्हीं तीनो कालो में। भूत बदले भविष्य बदले या बदले वर्तमान। फिर जीना पड़ता है इन्हीं कालो के साथ।। किसके भाग्य में क्या लिखा ये तो भाग्य विधाता जाने। पर मैं जो कुछ भी करता अपनी मेहनत […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।