
जनसरोकारों को भूल गए है
राजा स्वहित साध रहे है
स्वयं पांच लाख वेतन पा रहे है
जनता को महंगाई से रुला रहे है
किसान कंगाली मे बदहाल है
व्यापारी बेचारा तंगहाल है
गरीब की गरीबी बढ़ती जा रही
उनकी अमीरी आकार बढ़ा रही
आर्थिक असमानता मुहं चिढ़ा रही
समाज मे वह खाई बढ़ा रही
इस बजट मे भी कुछ नही मिला
बजट अमीरो का पिटारा ही रहा
प्रभु सरकार को सद्बुद्धि दे दो
गरीबो को भी जीने का हक दे दो।
#श्रीगोपाल नारसन

