ओ रे मनवा

ओ रे मनवा तू काहे को रोए,
ये दुनियां है बेगानी।
ना है जग में तेरा कोई ,
बन जा तू मीरा दीवानी।

प्रभु चरणों में वार दे जीवन,
ये दुनियां है आनी जानी।
मतलब के हैं रिश्ते नाते ,
मत कर तू नादानी।

सीता जैसी पतिव्रता संग,
जग ने की बहुत मनमानी।
तुझ पर ना है जग को भरोसा,
मत कर तू हैरानी।

अपनों से ही छली द्रोपदी,
जुए की बन गई चीज बेगानी।
भरी सभा में दुष्टों ने मिलकर,
कर ली अपनी मनमानी।

बीच सफ़र में छोड़ के जाना,
है जग की रीति पुरानी।
सुख में साथी हैं बहुतेरे,
दुःख में है दुनियां अनजानी।

लंबा सफर है,बीच भंवर है,
अब हार है मैंने मानी,
कृष्ण कन्हैया तू ही खिवैया,
अब तेरे बिन कोई ना सानी।

भव सागर से पार करो प्रभु,
अब दुनियां रास ना आनी।
घाव हरे हैं ,जग ने दिए हैं,
दिल में दर्द है इनकी निशानी।

पग पग पर मिले हैं धोखे,
जिसको भी अपना मानी।
हे मुरलीधर करो कृपा अब,
अब उंगली तेरी है थामी।

ओ रे मनवा तू काहे को रोए,
ये दुनियां है बेगानी।
ना है जग में तेरा कोई,
बन जा तू मीरा दीवानी।

सपना सिंह
औरैया(उत्तरप्रदेश)

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