वो मुझे नहीं मिलती।।

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ढूंढता हूं जिसे कि, वो मुझे नहीं मिलती
चाहता हूं जिसे कि, वो मुझे नहीं मिलती
दर्द का रिश्ता हमारा रहा है सदियों से
दुकां में ढूंढी खुशी, वो मुझे नहीं मिलती।।

मिली जो पहली नजर, वो मुझे नहीं मिलती
रखा था जिसकी खबर, वो मुझे नहीं मिलती
तरस गये है अब दीदार उसका पाने को
नज़र जो ढूंढे नज़र, वो मुझे नहीं मिलती।।

शराफत उसकी गज़ब, वो मुझे नहीं मिलती
नज़ाकत उसकी गज़ब, वो मुझे नहीं मिलती
हाथों से चेहरा ढका था जो उसने शरमाकर
हया थी उसकी गज़ब,वो मुझे नहीं मिलती।।

अब तो मुस्कान गज़ब,वो मुझे नहीं मिलती
थी मेरी जान गज़ब, वो मुझे नहीं मिलती
उसकी फितरत थी अलग सोचने की आदत थी
जो थी इन्सान गज़ब, वो मुझे नहीं मिलती।।

आंखों में आब गजब, वो मुझे नहीं मिलती
संजोया ख्वाब गजब, वो मुझे नहीं मिलती
हटा के रुख से अपने परदा अदब फरमाया
की जो आदाब गजब, वो मुझे नहीं मिलती।।

देखे मुड़ मुड़ के रस्ते, वो मुझे नहीं मिलती
कटा सफर जो हंसते, वो मुझे नहीं मिलती
सुनाया उसका जो किस्सा सभी फरिश्तों को
तरसते हैं फरिश्ते, वो मुझे नहीं मिलती।।

है उसकी सोच अलग, वो मुझे नहीं मिलती
है उसकी खोज अलग, वो मुझे नहीं मिलती
जिन्दगी जीने का उसको सलीका है मालूम
दिलों में मौज अलग, वो मुझे नहीं मिलती।।

जो सबसे बेहतरीन, वो मुझे नहीं मिलती
दिखे जो नाज़नीन, वो मुझे नहीं मिलती
मिला जो उससे तो फिर दिल में ये ‘एहसास’ हुआ
है जो सबसे हसीन, वो मुझे नहीं मिलती।।

अजय एहसास

अम्बेडकर नगर (उ०प्र०)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।