लॉकडाउन में शादी की झलक

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भेज रहे है प्रेम निमंत्रण,प्रियवर तुम्हे दिखावे को।
आ जाना न कभी भूल से,तुम यहां खाने को।।

लॉकडाउन देश में लगा हुआ है,बारात में कोई नहीं जाएगा।
दूल्हा केवल अकेला ही,दुल्हन को बाइक पर ले आयेगा।।

बनवाए है छप्पन भोग हमने,उसका टोकन तुम्हे मिल जाएगा।।
जिसकी जैसी चॉइस होगी,उसे पैक करवा कर ले जाएगा।।

बैंडबाजा नहीं बजेगा,केवल लाउड स्पीकर बज पायेगा।
घुड चढ़ी भी नहीं होगी,दूल्हा किसी के कंधे पर चढ़ जाएगा।।

दिया था हमने तुम्हे लिफाफा,तुम्हे भी लिफाफा देना होगा।
होगे जितने रुपए लिफाफे में,उसके अनुसार टोकन मिल जायेगा।।

अगर आ न सको किसी कारणवश,होम डिलीवरी का प्रोविजन होगा।
पर उसके लिए लिफाफे के साथ,होम डिलीवरी चार्ज देना होगा।।

रखना बरकरार ये व्यवहार,जब तक देश में लॉकडाउन रहेगा।
पालन करना होगा इन नियमो का,वरना परिणाम भुगतना होगा।।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।