इंसान का डर

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चिड़िया और पेड़ की दोस्ती थी।
“चिड़िया, चिड़िया .. बड़ी चहक रही हो ? कहाँ उड़ती रहती हो आजकल !” पेड़ ने उत्सुकता के साथ पूछा।

“आजकल गाँव तो गाँव शहर भी शांत हैं, न धुआँ है, न शोरगुल। दाना-पानी भी खूब मिल रहा है” पेड़ से चिड़िया बोली।

“वो क्यों भला ” पेड़ ने जानना चाहा।

“अब तुम ठहरे जंगल के एक पेड़, दुनिया की तुम्हें कहाँ कोई खोज खबर होती है, चलो बताती हूँ– अभी सभी लोग घरों में बंद हैं, सुना है कोई जानलेवा विषाणु आया है उसके डर से।” चिड़िया ने उसकी जिज्ञासा शांत की।

“इतना ताक़तवर इंसान और डर !” पेड़ ने आश्चर्य जताया।

“हाँ भाई , मुझे भी अज़ीब लग रहा है , इंसानों ने तो हमारे हिस्से की चीजों पर भी बेखौफ़ अधिकार जमा लिया है- नभ , हवा, पानी, जंगल- कुछ भी नहीं छोड़ा। पर हाँ अब इस विषाणु ने मौत देकर डरा रखा है।” चिड़िया बोली।

“अब क्या होगा उसका।” पेड़ को जैसे चिंता सताई।

“अब शायद उसे अहसास हो जायेगा कि वह प्रकृति का स्वामी नहीं, बल्कि उसके परिवार का एक हिस्सा मात्र है। उसको अधिकार बाँटने होंगे और कर्त्तव्य समझने होंगे।” आशा भरी चिड़िया बोली।

पेड़ अपनी शाखाओं को हिलाकर मानों हामी भर रहा था।

#डॉ. अनिता जैन “‘विपुला’

 परिचय :1. नाम:  डॉ. अनिता जैन 2. धारक नाम / उपनाम (लेखन हेतु): “विपुला”3. जन्मदिन एवं जन्म 11 जुलाई स्थान:  बीकानेर राजस्थान 4. शैक्षणिक योग्यता (ऐच्छिक):   Ph. D. , M. Phil. NET.M.A. (संस्कृत – साहित्य , दर्शन )M.A. ( हिंदी साहित्य )MBA in HR5. व्यवसाय: अतिथि प्राध्यापक ( विश्वविद्यालय में )                        6. प्रमुख लेखन विधा: छंद मुक्त, मुक्तक, हायकू ,वर्णपिरामिड, क्षणिका, लघुकथा,निबन्ध,   आलेख आदि।        7. साहित्यिक उपलब्धियाँ/पुरस्कार/सम्मान: विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कविताएँ एवं लेख प्रकाशित होते रहते हैं। आकाशवाणी में एंकरिंग एवं कविता पाठ आदि । ngo से जुड़ी हुई हूँ। समय समय पर सामाजिक उत्थान के कार्यों में सहभागिता।हिंदी के साथ साथ राजस्थानी भाषा में भी लेखन। “वर्णपिरामिड श्री”, “सर्वश्रेष्ठ मुक्तककार”,  सम्मान आदि ।8. रुचि/शौक़: संगीत, अध्ययन,लेखन,प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण,कुकिंग आदि ।9. उदयपुर राजस्थान ।10.  उपलब्धियों में- 12 वीं बोर्ड की योग्यता सूची में 7वाँ स्थान। मेडल एवं मैरिट छत्रवृति प्राप्त, बी. ए. में राष्ट्रीय छत्रवृत्ति प्राप्त।NSS में प्री आर डी एवं राष्ट्रीय एकात्मकता शिविर में राजस्थान का प्रतिनिधित्व।वाद विवाद , आशु भाषण, निबन्ध एवं कविता आदि में छात्र जीवन में अनेक पुरस्कार प्राप्त। *महाविद्यालय शिक्षिका के रूप में केरियर की शुरुआत। अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में पत्र वाचन, शोध पत्र प्रकाशन। *दो पुस्तकें शीघ्र प्रकाशित होने वाली हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।