जियो और जीने दो

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दुनिया का दिमाग ठीक करने वाले पागल हुए जा रहे है। हाथियों से लड़ने वाले मच्छरों से घायल हुए जा रहे है।
किस समय क्या होने वाला है ये कोई नहीं जानता क्योंकि जो खुश रहना चाहते है। वही आज पल पल रो रहे है क्योंकि
हवा के हर झोके में,
एटमबम छुपे हुए है
दवा के झरोखो में
रोगो के जन्म हुए है
अब इस धरती पर विश्वास कैसे हो,
दयालुता के साये में ही दानवता के दस्तु घुसे हुए हो,

अविश्वास से फटे हॄदय को
प्रेम से सिने दो
क्यो हिंसा पर तुले हुए हो
खुद जियो और ओरो को जीने दो।

स्वप्निल प्रदीप जैन,

खंडवा

परिचय-

नाम. स्वप्निल प्रदीप जैन
साहित्यिक नाम.. स्वप्नदीप
जन्मतिथी. 17जून
वर्तमान पता. महावीर जैन मंदीर के पास घासपुरा खंडवा
राज्य. मध्यप्रदेश
शिक्षा. एम कॉम. एम ए
कार्यक्षेत्र. ट्रेनर काऊन्सलर
विधा. गीत गजल कविता कहानी एंकाकी
प्रकाशन. साहित्य सृजन पब्लिक पावर समाचार पत्र अमेजान किंडल पर परिवार समाज की रीढ
सम्मान. साहित्य सुरभि सम्मान
मध्यप्रदेश लेखक संघ से साहित्य सम्मान काव्य रांगोली से अरूणीमा सम्मान द डायर डाॉट कॉम से साहित्य सम्मान लायन्स क्लब से सम्मानित द लेडी बर्ड सोसायटी से सम्मानित
अन्य उपलब्धि… समाजसेवी काउन्सलर वन स्टाप सेन्टर… वुमन्सपॉवर खंडवा कि एडमिन सदस्य .जय जिनेन्र्द मडंल सचिव. विद्या पूर्णा महिला सामाजिक संस्था कि अध्यक्ष रजिस्ट्रर. समम्यक ग्रुप एडमीन
लेखन का उद्देश्य. हिन्दू सभ्यता संस्कृति .परिवार समाज को पल्लवित करने और उन्हे विलुप्त होने से बचाना।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।