भ्रष्टाचारी की दुखद मृत्यु पर शोक : एक प्रश्नचिन्ह (संस्मरण)

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   वह शराब पीकर बीच सड़क में गिरा हुआ था। राहगीर उसे घृणा की दृष्टि से देख कर आगे बढ़ रहे थे। उसकी फटी व टूटी-फूटी आवाज़ आ रही थी। वह कह रहा था कि ईश्वर ने उसे खज़ाना दिया हुआ है। इसलिए वह आनंद ले रहा है। 
   वह सरकारी विभाग में कार्यरत था और अपने वेतन से अधिक घूसखोरी से कमाई करता था। इसलिए वह शराब, कबाब व शबाब का आदी हो चुका था। 
   उसके बच्चे भी आवारगी करते थे। जिसके कारण अक्सर पुलिस के शिकंजे में फंस जाते थे। 
    एक दिन समाचार आया कि शराब के नशे में गाड़ी चलाते हुए उसकी दुर्घटना के कारण मृत्यु हो गई है।
   उसकी दुखद मृत्यु पर शोक प्रकट करने वाले घुटी आवाज़ में कानाफूसी कर रहे थे कि यह भी अन्य भ्रष्टाचारियों की भांति अपनी कमाई भी नहीं खा सका। चर्चाओं में प्रश्न था कि किसी ऐसे भ्रष्टाचारी का नाम बताओ जिसने अपना वेतन व पेंशन 'ईमानदारों' की भांति खाई हो? 

निष्कर्ष = भ्रष्टाचारी अल्प आयु होते हैं।
राय = भ्रष्टाचारियो ईश्वर से डरो।

इन्दु भूषण बाली
पत्रकार, समाजसेवक, एसएसबी विभाग का पीड़ित पूर्व कर्मचारी, लेखक हिंदी डोगरी व अंग्रेजी एवं भारत के राष्ट्रपति पद का पूर्व प्रत्याशी तहसील ज्यौड़ियां जिला जम्मू जम्मू कश्मीर

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।