महारथी कर्ण

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भाग्य जिसे दुर्भाग्य बन पग पग पर छलता रहा
वो सूर्यपुत्र हो अंधकार से जीवन भर लड़ता रहा
जन्मा सूरज के औरस से
त्यागा लोक लाज के भय से
कुरुवंश का ज्येष्ठ पुत्र
सिंहासन का यथार्थ अधिकारी
रहा उपेक्षित जीवन भर
थी विडम्बना उस पर भारी
सूतपुत्र होना उसको जीवन भर खलता रहा
सूर्यपुत्र हो अंधकार से…
था महावीर पर रंगभूमि में
राजवंशी कहला न सका
एक प्रश्न चिह्न ले रहा निरुत्तर
अपना कौशल दिखला न सका
तिरस्कार का घूँट पी मन ही मन जलता रहा
सूर्यपुत्र हो अंधकार से…
जब रचा स्वयंवर द्रुपदसुता का
फिर अपमान का घूँट पिया
अर्जुन का प्रतिद्वंद्वी होकर
नीचे दृष्टि कर बैठ गया
था श्रेष्ठ धनुर्धर फिर भी अपने हाथों को मलता रहा
सूर्यपुत्र हो अंधकार…
परशुराम गुरु भक्त निःशंक
बिच्छू ने जब मारा डंक
हुआ गात में क्षणिक कंप
गुरु निद्रा हो जायेगी भंग
जंघा हुई रक्तस्नात
फिर भी गुरु ने दिया श्राप
शापित जीवन का भार लिए
निज मार्ग पर चलता रहा
सूर्यपुत्र हो अंधकार से…
कुंती ने सत्य किया उदघाटित
तुम ज्येष्ठ पुत्र अब रहो प्रकाशित
हैं कृष्ण जहाँ ,सत चित है
जीत उन्हीं की निश्चित है
पर त्याग सकूँगा न दुर्योधन
मुझ पर उसका ऋण आजीवन
दुर्योधन की जय का सपना आँखों में पलता रहा
सूर्यपुत्र हो अंधकार से…
धारण करके ब्राह्मण वेश
निज स्वार्थ हेतु पहुँचे सुरेश
पुत्र परास्त न हो रण में
कवच कुंडल लिए क्षण में
दिया दान बिन देह संकुचन
पड़ा नाम तब वैकर्तन
दानवीर वो महावीर जीवन को दलता रहा
सूर्यपुत्र हो अंधकार से….
आसन्न हुआ कुरुक्षेत्र समर
कौन्तेय प्रत्यक्ष ले अस्त्र शस्त्र
धँसा भूमि में रथ का चक्र
सब नक्षत्र हुए अब वक्र
निःशस्त्र योद्धा अब गया हार
कुंती का वचन हुआ साकार
पाँच पुत्र जीवित रण हों
कर्ण रहे या अर्जुन हो
कुरुवंश का सूरज अब अस्ताचल को ढलता रहा
सूर्यपुत्र हो अंधकार से…
#रश्मि शर्मा
 उदयपुर(राजस्थान)

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।