
पतझड़ का ये मौसम आया।
नीर तनिक न मौसम भाया।।
पशु – पक्षी सब भटक रहे है।
दूर-दूर तक तनिक न छाया।।
बहुत कठिन के दिन ये होते।
पतझड़ में भी छुपी है माया।।
पतझड़ भांति समय दिखता।
अलग अलग परिवर्तन पाया।।
भरी जवानी मिल जुल रहते।
पतझड़ की है कैसी ये काया।।
गर्मी के दिन दुर्दिन सब होते।
वक्त समय पर सदा है गाया।।
अरे पात क्यों छोड़ के जाते।
भरी जवानी मिलकर खाया।।
#नवीन कुमार भट्ट
परिचय :
पूरा नाम-नवीन कुमारभट्ट
उपनाम- “नीर”
वर्तमान पता-ग्राम मझगवाँ पो.सरसवाही
जिला-उमरिया
राज्य- मध्यप्रदेश
विधा-हिंदी

