48 वें राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह के अवसर पर डॉ. अवध के बीस नारे

avdhesh
1-
घर,बाहर हो,या हो फैक्ट्री ।
विदआउट पीपीई, नो इंट्री ।।
2-
आज कसम हम खाएँगे ।
पी पी ई अपनाएँगे ।।
1-
घर,बाहर हो,या हो फैक्ट्री ।
विदआउट पीपीई, नो इंट्री ।।
2-
आज कसम हम खाएँगे ।
पी पी ई       अपनाएँगे ।।
3-
हमसे  है परिवार हमारा ।
फर्ज सुरक्षा का है प्यारा ।।
4-
सुरक्षा को अपनाएँगे ।
दुर्घटना  दूर भगाएँगे ।।
5-
मैं बदलूँगा,  तुम बदलोगे,  बदलेगा संसार ।
सभी सुरक्षित,सभी स्वस्थ हों,एनएससी उपहार ।।
6-
सुरक्षित वापस घर है आना ।
नहीं   चलेगा  कोई  बहाना ।।
7-
अपना जीवन है अपनों का ।
बीवी – बच्चों के सपनों का ।।
8-
होश में रहकर जोश दिखाएँ ।
सुरक्षा  का  परिवेश  बनाएँ ।।
9-
शुद्ध  हवा  पानी  प्रकाश है ।
सुरक्षा से ही हर विकास है ।।
10-
रहें सुरक्षित,रखें सुरक्षित,यही हमारा नारा है।
दुर्घटना को शून्य बनाएँ, जीवन सबसे प्यारा है ।।
11-
रखो  सुरक्षित तीनों को ।
साथी, स्वयं, मशीनों को ।।
12-
पहले सेफ्टी, फिर हर काम ।
वरना  होगा  काम  तमाम ।।
13-
जीवन मिलता नहीं दुबारा ।
सुरक्षा है एक मात्र सहारा ।।
14-
जीवन  होता है  अनमोल ।
एन एस सी की जय बोल ।।
15-
नशा  बना  देता है  दानव ।
बचकर रहना इससे मानव ।।
16-
हौसलों  के  पंख  से   उड़ान भर ।
सुरक्षित होकर पूरा अभियान कर ।।
17-
बनना  नहीं  हमें    नादान ।
शून्य दुर्घटना, अपनी शान ।।
18-
सजग समर्थ कुशल मजदूर ।
दुर्घटना   से    रहता     दूर ।।
19-
साउस कीपिंग का ये अर्थ ।
नहीं करो जीवन को व्यर्थ ।।
20-
एन एस सी का है संदेश ।
सुरक्षित होवे अपना देश ।।
परिचय
नाम : अवधेश कुमार विक्रम शाह
साहित्यिक नाम : ‘अवध’
पिता का नाम : स्व० शिवकुमार सिंह
माता का नाम : श्रीमती अतरवासी देवी
स्थाई पता :  चन्दौली, उत्तर प्रदेश
 
जन्मतिथि : पन्द्रह जनवरी सन् उन्नीस सौ चौहत्तर
शिक्षा : स्नातकोत्तर (हिन्दी व अर्थशास्त्र), बी. एड., बी. टेक (सिविल), पत्रकारिता व इलेक्ट्रीकल डिप्लोमा
व्यवसाय : सिविल इंजीनियर, मेघालय में
प्रसारण – ऑल इंडिया रेडियो द्वारा काव्य पाठ व परिचर्चा
दूरदर्शन गुवाहाटी द्वारा काव्यपाठ
अध्यक्ष (वाट्सएप्प ग्रुप): नूतन साहित्य कुंज, अवध – मगध साहित्य
प्रभारी : नारायणी साहि० अकादमी, मेघालय
सदस्य : पूर्वासा हिन्दी अकादमी
संपादन : साहित्य धरोहर, पर्यावरण, सावन के झूले, कुंज निनाद आदि
समीक्षा – दो दर्जन से अधिक पुस्तकें
भूमिका लेखन – तकरीबन एक दर्जन पुस्तकों की
साक्षात्कार – श्रीमती वाणी बरठाकुर विभा, श्रीमती पिंकी पारुथी, श्रीमती आभा दुबे एवं सुश्री शैल श्लेषा द्वारा
शोध परक लेख : पूर्वोत्तर में हिन्दी की बढ़ती लोकप्रियता
भारत की स्वाधीनता भ्रमजाल ही तो है
प्रकाशित साझा संग्रह : लुढ़कती लेखनी, कवियों की मधुशाला, नूर ए ग़ज़ल, सखी साहित्य, कुंज निनाद आदि
प्रकाशनाधीन साझा संग्रह : आधा दर्जन
सम्मान : विभिन्न साहित्य संस्थानों द्वारा प्राप्त
प्रकाशन : विविध पत्र – पत्रिकाओं में अनवरत जारी
सृजन विधा : गद्य व काव्य की समस्त प्रचलित विधायें
उद्देश्य : रामराज्य की स्थापना हेतु जन जागरण 
हिन्दी भाषा एवं साहित्य के प्रति जन मानस में अनुराग व सम्मान जगाना
पूर्वोत्तर व दक्षिण भारत में हिन्दी को सम्पर्क भाषा से जन भाषा बनाना
 
तमस रात्रि को भेदकर, उगता है आदित्य |
सहित भाव जो भर सके, वही सत्य साहित्य ||

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पिता

Tue Mar 5 , 2019
सजीवन  प्राण देता है, सहारा  गेह का होते। कहें कैसे विधाता है,पिताजी कम नहीं होते। मिले बल ताप ऊर्जा भी, .                     सृजन पोषण सभी करता। नहीं बातें दिवाकर की, .                      पिता भी कम नही तपता। मिले चहुँओर से रक्षा,करे हिम ताप से छाया। नहीं आकाश की बातें,पिताजी में यहीं माया। […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।