मन की किताब

Read Time0Seconds

cropped-cropped-finaltry002-1.png

जब भी खोली मन की किताब

पन्ने सारे सफेद मिले
ऐसा लगा कि जीवन सारा
श्वेत जल की धारा सा रहा
जीवन के इस सफर में लोग तो अनगिनत मिले
पर ऐसा कोई न मिला जो मेरा हमसफ़र बने
अनगिनत लम्हे ,यादें व सुनहरे पल
इन यादों को देते हैं प्यार का संबल
बस इस इंतजार में हूं कि
मेरी इस किताब को भी मिल जाए एक शीर्षक
और शुरू हो रंगों का एक नया सफर
#अंजलि वैद
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

जब मधुर सुहानी भोर हो

Tue Jan 1 , 2019
प्राची में बिखरे कुंकुम, रतनार नयन मन हो जाये ! आलोकित उर अर्णव मुख , तम तोम सहमकर रह जाये !! भोर कटोरी ,हो मधु  बोरी सुरभित अम्बर छोर हो ! जब मधुर सुहानी भोर हो !!! आशाओं की विकसे कलियाँ, उत्साह उरों में मुस्कुराये ! खग -कुल कुल -कुल […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।