सांता का उपहार 

renu
 सांता! आज जब तुम आओगे
तो मेरी एक बात मानना
 पल-पल फिसलते हुए रिश्तों को
अपने झोले से खुशियों का पुलिंदा
 मेरे नाम करते हुए
उन्हें थमाते जाना
कल तक जो अपने थे
उनमें भाव खत्म होने लगा है
कल तक जिन बातों में रस था
आज उनमें विष उतरने लगा है
कल तक एक दूजे के सुख-दुख में
ढाल बनकर साथ खड़े थे
आज एक दूजे से
बचके निकल रहे हैं
कल तक जिनको पाकर
सूरज सा खिल रहे थे
आज राख की ढेरी से कजल रहें हैं
 फिर भी कुछ अवशेष है
खंडित होने से इनको रोक लो
बस इसी को पूरे वर्ष की साधना को
सुंदर उपहार दे, मेरे मन को
इंद्रधनुषी रंगों से सराबोर कर
सांता आया खुशियां लाया
पंक्ति को सार्थक कर
क्रिसमस के त्योहार की
खुशी ला दो तुम
सांता अपना उपहार दे दो तुम
सांता अपना उपहार दे दो तुम।
#रेनू शर्मा*शब्द मुखर*
जयपुर

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