अभिलाषा

alok premi
जर्जर डाली है फूल,मुझे झरने दो
मैं झरकर हूँगा शांत किसी कोने में
फिर व्यर्थ न दुख होगा मुझको रोने में
मैने देखा संसार,पता है सुख क्या
है चार दिनों का सुख नीरस जीवन में
मुट्ठी भर मुझको धूल आज धरने दो
जर्जर डाली है फूल,मुझे झरने दो।
साथी सपने हैं,स्वप्न बना यह जीवन
फिर भी परिजन से घिरा हुआ है नर-तन
उस सपने में संसार स्वर्ण ही का है
अब देखें,बोलो कौन भूख या क्रंदन
जाने दो मुझको कूल,आज तिरने दो
जर्जर डाली है फूल,मुझे झरने दो।।
यह हरी-भरी है दूब,हरी यह दुनिया
पर है दुख का जंजाल अरी यह दुनिया
मैने चुपके सुनली भौरों की बातें
चालकों की है चाल-भरी यह दुनिया
काटों पर मुझको झूल आज मरने दो
जर्जर डाली है फूल,मुझे झरने दो।।
#आलोक प्रेमी
परिचय- 
नाम-आलोक प्रेमी 
पिता-श्री परमानंद प्रेमी 
माता-श्रीमती गोदावरी देवी
स्थाई पता-ग्रा•+पो•-भदरिया 
थाना-अमरपुर 
जिला-बाँका(बिहार)
     813101
शैक्षणिक योग्यता-शोधार्थी नेट (हिन्दी)
अन्य-आकाशवाणी भागलपुर से नियमित रूप से स्वरचित कहानी/कविता/आलेख/वार्ता का प्रसारण। 
शौक-अच्छी किताबें खरीदने की 

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