सत्यव्रत सा धर्म निभाना

shashank mishra

आओ बच्चों तुम्हें सुनायें

एक रोचक मधुर कहानी

सत्यधर्म की बातें जिसमें

सत्यव्रत और उनकी रानी

 

 

राजा का था अटल नियम

एक पूर्ण और ठोस नियम

जो भी बाजार में बिकने आये

नहीं लौटकर वापस जाये

 

 

बचा सामान स्वंय खरीदकर

वह अपना वचन निभाते थे

सत्य वचन के पालनहार

राजा सत्यव्रती कहलाते थे

 

 

 

एक बार की बात सुनो तुम

थे शनि देव बिकने को आये

आते देखने जिन्हें बहुत से

खरीद के न कोई ले जाये

 

 

 

सुनता जो कोई इनकी खरीद से

सब धन सम्पत्ति चला जायेगा

उसमें भला क्या हिम्मत है

जो खरीदकर घर ले जायेगा

 

 

 

शाम हुई नियमानुसार ही

राजा ने वह मूर्ति मंगवाई

थी अनिष्टकारी फिर भी

वचन के लिए खरीद करवाई

 

 

जब देखा शनिश्चर देव को

एक-एक सब लगे खिसकने

न्याय धर्म लक्ष्मी जो भी थे

राजा के सुप्रियजन अपने

 

 

 

सत्य बोला  सुनिये हे राजन !

शनि के साथ मैं न रह पाऊंगा

धर्म न्याय के साथ यहां से

प्रस्थान मैं भी कर जाऊंगा

 

 

 

तुम जाओगे सत्य यहां से

जिसकी रक्षा मैंने अब तक की

जान अनिष्टकारी है फिर भी

खरीद शनि देव की मूर्ति ली

 

 

 

सुन ये वचन राजा सत्यव्रत के

सत्य ने न आगे कदम बढ़ाया

देखकर सत्य की दृढ़ता को

लक्ष्मी न्याय धर्म भी वापस आया

 

 

 

देखो बच्चों सत्य की खातिर

कभी न पीछे कदम हटाना

आयें चाहें कितनी मुसीबतें

राजा सत्यव्रत सा धर्म निभाना।

#शशांक मिश्र

परिचय:शशांक मिश्र का साहित्यिक नाम `भारती` और जन्मतिथि १४ मई १९७३ है। इनका जन्मस्थान मुरछा-शहर शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) है। वर्तमान में बड़ागांव के हिन्दी सदन (शाहजहांपुर)में रहते हैं। भारती की शिक्ष-एम.ए. (हिन्दी,संस्कृत व भूगोल) सहित विद्यावाचस्पति-द्वय,विद्यासागर,बी.एड.एवं सी.आई.जी. भी है। आप कार्यक्षेत्र के तौर पर संस्कृत राजकीय महाविद्यालय (उत्तराखण्ड) में प्रवक्ता हैं। सामाजिक क्षेत्र-में पर्यावरण,पल्स पोलियो उन्मूलन के लिए कार्य करने के अलावा हिन्दी में सर्वाधिक अंक लाने वाले छात्र-छात्राओं को नकद सहित अन्य सम्मान भी दिया है। १९९१ से लगभग सभी विधाओं में लिखना जारी है। श्री मिश्र की कई पुस्तकें प्रकाशित हैं। इसमें उल्लेखनीय नाम-हम बच्चे(बाल गीत संग्रह २००१),पर्यावरण की कविताएं(२००४),बिना बिचारे का फल (२००६),मुखिया का चुनाव(बालकथा संग्रह-२०१०) और माध्यमिक शिक्षा और मैं(निबन्ध २०१५) आदि हैं। आपके खाते में संपादित कृतियाँ भी हैं,जिसमें बाल साहित्यांक,काव्य संकलन,कविता संचयन-२००७ और अभा कविता संचयन २०१० आदि हैं। सम्मान के रूप में आपको करीब ३० संस्थाओं ने सम्मानित किया है तो नई दिल्ली में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वरिष्ठ वर्ग निबन्ध प्रतियोगिता में तृतीय पुरस्कार-१९९६ भी मिला है। ऐसे ही हरियाणा द्वारा आयोजित तीसरी अ.भा.हाइकु प्रतियोगिता २००३ में प्रथम स्थान,लघुकथा प्रतियोगिता २००८ में सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति सम्मान, अ.भा.लघुकथा प्रति.में सराहनीय पुरस्कार के साथ ही विद्यालयी शिक्षा विभाग(उत्तराखण्ड)द्वारा दीनदयाल शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार-२०१० और अ.भा.लघुकथा प्रतियोगिता २०११ में सांत्वना पुरस्कार भी दिया गया है। आप ब्लॉग पर भी सक्रिय हैं। आप अपनी उपलब्धि पुस्तकालयों व जरूरतमन्दों को उपयोगी पुस्तकें निःशुल्क उपलब्ध करानाही मानते हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-समाज तथा देशहित में कुछ करना है।

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