वाग्देवी-वंदना

devendra kumar pathak
सारदे, माँ सारदे, शत्-शत् नमन् माँ सारदे!
प्रेम,करुणा,न्याय की
सद्वृत्तियाँ धुंधला रहीं;
नीतियों को छद्म,छल,
दुर्वृत्तियाँ झुठला रहीं.
इस सदी के त्रस्त जन का
सुन रुदन माँ सारदे!
सत्य,शिव,सुंदर की शाश्वत-
भावना का ही वरण हो;
नव सदी में नव प्रभाती
राग से जन जागरण हो.
शांति,श्रम,समता की सरगम
गाएँ जान माँ सारदे!
हों उदित मानव-मनीषा
मन में नव संकल्पनाएँ;
कंठ स्वर में हो स्वभाषा,
प्रगति के नवगीत गाएँ.
नवसदी में सार्थक हो
सर्जना माँ सारदे!
धर्म हो सेवा परम्
सबकी हरें भय भीरुता;
हर ह्रदय को जीतना ही
हो हमारी वीरता.
कर सकें दायित्व का हम
निर्वहन माँ सारदे!

#देवेन्द्र कुमार पाठक ‘महरूम’

परिचय: म.प्र. के कटनी जिले के गांव भुड़सा में 27 अगस्त 1956 को एक किसान परिवार में जन्म। शिक्षा-M.A.B.T.C. हिंदी शिक्षक पद से 2017 में सेवानिवृत्त. नाट्य लेखन को छोड़ कमोबेश सभी विधाओं में लिखा ……’महरूम’ तखल्लुस से गज़लें भी कहते हैं। 2 उपन्यास, ( विधर्मी,अदना सा आदमी ) 4 कहानी संग्रह,( मुहिम, मरी खाल : आखिरी ताल,धरम धरे को दण्ड,चनसुरिया का सुख ) 1-1 व्यंग्य,ग़ज़ल और गीत-नवगीत संग्रह,( दिल का मामला है, दुनिया नहीं अँधेरी होगी, ओढ़ने को आस्मां है ) एक संग्रह ‘केंद्र में नवगीत’ का संपादन ‘ वागर्थ’, ‘नया ज्ञानोदय’, ‘अक्षरपर्व’, ‘ ‘अन्यथा’, ,’वीणा’, ‘कथन’, ‘नवनीत’, ‘अवकाश’ ‘, ‘शिखर वार्ता’, ‘हंस’, ‘भास्कर’ आदि पत्र-पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित.आकाशवाणी,दूरदर्शन से प्रसारित. ‘दुष्यंतकुमार पुरस्कार’,’पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी पुरस्कार’ आदि कई पुरस्कारों से सम्मानित। कमोबेश समूचा लेखन गांव-कस्बे के मजूर-किसानों  के जीवन की विसंगतियों,संघर्षों और सामाजिक,आर्थिक समस्याओं पर केंद्रित।

#देवेन्द्र कुमार पाठक

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।