जंगली कौन

vinod silva
कितना भाग्यशाली था
आदिमानव
तब न कोई अगङा था
न कोई पिछङा था
हिन्दू-मुसलमान का
न कोई झगङा था
छूत-अछूत का
न कोई मसला था
अभावग्रस्त जीवन चाहे
लाख मजबूर था
पर धरने-प्रदर्शनों से
कोसों दूर था
कन्या भ्रूण-हत्या का
पाप नहीं था
किसी ईश्वर-अल्लाह का
जाप नहीं था
न भेदभावकारी
वर्णव्यवस्था थी
मानव जीवन की वो
मूल अवस्था थी
मूल मानव को
जंगली कहने वालो
जंगली कौन है
पता लगा लो
#विनोद सिल्ला
 
जीवन परिचय
 
विनोद सिल्ला 
माता का नाम/ पिता  का नाम
    श्रीमती संतरो देवी/श्री उमेद सिंह सिल्ला 
 पत्नी का नाम :- श्रीमती मीना रानी
 
  जिला फतेहाबाद (हरियाणा)
 
शिक्षा/जन्म तिथी
    एम. ए. -इतिहास, बी. एड.
व्यवसाय अध्यापन
प्रकाशन विवरण .
जाने कब होएगी भोर (काव्यसंग्रह)
खो गया है आदमी (काव्यसंग्रह)
 मैं पीड़ा हूँ (काव्यसंग्रह)
यह कैसा सूर्योदय’ (काव्यसंग्रह)
संपादित पुस्तकें 
प्रकृति के शब्द शिल्पी : रूप देवगुण (काव्यसंग्रह)
 मीलों जाना है (काव्यसंग्रह)
 
सम्मान का विवरण 
डॉ. भीमराव अम्बेडकर राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड-2011
भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा 
 महात्मा ज्योति बा फूले राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड-2012
भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा 
ऑल इंडिया समता सैनिक दल द्वारा 15, जून 2014 को 
उपमंडल प्रशासन, टोहाना द्वारा गणतन्त्र दिवस, 26, जनवरी 2012 को
 दैनिक सांध्य समाचार पत्र, ‘टोहाना मेल द्वारा 17, जून 2012 के
 अम्बेडकरवादी लेखक संघ द्वारा 06, जुलाई 2014 को
लाला कली राम साहित्य सम्मान-2015
साहित्य सभा, कैथल
के सी टी ग्रूप ऑफ इन्सटीट्युशन फतेहगढ़, लहरागागा (पंजाब) 07, फरवरी 2017
 संस्थाओं से सम्बद्धता (यदि कोई हो तो विवरण दें)
हरियाणा प्रादेशिक हिन्दी साहित्य सम्मेलन,टोहाना
अध्यक्ष (2013-15)
मुख्य सलाहकार (2015-17)

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।