सावन की पुकार…!!

0 0
Read Time2 Minute, 12 Second

tarkesh ojha

कांवड़ यात्रा पर विवाद से दुखी है खांटी खड़गपुरिया तारकेश कुमार ओझा.
पेश है नई कविता
बुलाते हैं धतुरे के वो फूल
धागों की डोर
बाबा धाम को जाने वाले रास्ते
गंगा तट पर कांवरियों का कोलाहल
बोल – बम का उद्गघोष
मदद को बढ़ने वाले स्वयंसेवियों के हाथ
कांवर की घंटी व घुंघरू
शिविरों में मिलने वाली शिकंजी
उपचार के बाद ताजगी देती चाय
पुरस्कार से लगते थे पांव में पड़े फफोले
यात्रा से लौट कर मित्रों को संस्मरण सुनाना
लगता था सावन सा सुहाना
यूं तो लंबित पड़ी है अपनी कांवड़ यात्रा
लेकिन कायम है यादों की पुकार का कोलाहल
क्योंकि मैने भी की है अनगिनत कांवड़ यात्राएं
शरीर में शक्ति रहने तक थी यात्रा कायम रखने की इच्छा
लेकिन शायद नियति को नहीं था यह मंजूर
कांवड़ यात्रा पर चल रहे विवाद से दुखी है आत्मा
क्योंकि सावन का शुरू से था
हमारे लिए अलग अर्थ
श्रावण यानी शिव से साक्षात्कार का महीना
सचमुच कांवड़ यात्रा पर हो रहे विवाद से दुखी है मन
न जाने अचानक ऐसा कैसे हुआ
अंतिम यात्रा तक कुछ अगंभीर कांवरिये
तो देखे थे मैने
लेकिन हुड़दंगी कभी नजर नहीं आए
फिर अचानक कैसे बदल गया परिदृश्य
सोच कर भी दुखी है मन – प्राण
निरुत्तर से हैं मानो भगवान …

#तारकेश कुमार ओझा

लेखक पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में रहते हैं और वरिष्ठ पत्रकार हैं | तारकेश कुमार ओझा का निवास  भगवानपुर(खड़गपुर,जिला पश्चिम मेदिनीपुर) में है |

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

लहराता तिरंगा

Tue Aug 14 , 2018
  लहराता तिरंगा देखकर मन प्रफुलित हो जाये, केशरिया रंग की शान ऐसी मन मे एक ऊर्जा बढ़ाये, देश पर प्राण लुटाने को ये हमारे मन में साहस बढ़ाये, लहराता तिरंगा देखकर मन प्रफुलित हो जाये, सफेद रंग की सुंदरता कुछ ऐसी जैसे चांदनी मुस्काए, लड़ाई झगड़ा ख़त्म कर ये […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।