हर पल जीवन का सँवार कर नारी भर देती है गागर में सागर जहाँ जहाँ पहुँच सकते हैं भास्कर तोड़ लाती ये तारे वहाँ जाकर ये छाई रहती हर डगर,हर पहर क्योंकि इनके बिना नहीं है गुजर-बसर इसीलिए कहते हैं महिलाओं की बात ही कुछ और है… दिनचर्या इनकी बड़ी […]
काव्यभाषा
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तुमको वंदन हे रघुनंदन! प्रभु अभिनंदन है, अभिनंदन, ठाढ़े करज़ोर करत वंदन, अभिनंदन हे दशरथनंदन! न जाने ये कैसी परीक्षा थी! सदियों-सदियों से प्रतीक्षा थी, दो दर्शन कौशल्यानंदन, प्रभु अभिनंदन है, अभिनंदन। दो-दो वनवास दिया जग ने, पुरुषोत्तम रूप जिया तुमने, तेरे अपराधी करते क्रंदन, प्रभु अभिनंदन है, अभिनंदन। है […]
