मृत्यु का अर्थ स्वर्ग नही फिर क्यों स्वर्गीय कहते हो पाप किये जिसने बहुत उसे नर्क में नही बताते हो स्वर्ग जाएगा या नर्क में कर्म निर्धारण करते है परमात्मा तटस्थ है भाई भेदभाव नही वह करते है अगर चाहिए स्वर्गलोक सद्कर्म पथ पर चले चलो हर लोक संवर जाएगा […]

प्रकृति कहती हमको बचा कर, जीवन धरा पर सरस बना लो। वृक्षों का तुम रोपण करके , वसुधा माँ को खूब सजा लो। सागर ,नदियाँ स्वच्छ बनाकर, जीवन अपना निर्मल बना लो। पीपल ,बरगद, नीम लगाकर, ऑक्सीजन तुम भरपूर पा लो। गिलोय ,तुलसी घर में लगा कर, तन मन अपना […]

हम बच्चे हैं नन्हें मुन्ने, जुल्म हम पर ढाओ ना। इस छोटी सी नन्ही उमर में, इतने काम बताओ ना।। अभी अभी तो चलना सीखा, मन्जिल अभी दिखाओ ना। अभी अभी तो बोलना सीखा, हमको ज्ञान रटाओ ना।। हम बच्चे हैं …………… सब संग हमारे खेलो कूदो, और घोड़ा बन […]

हाथों में थी, मात पिता के, सांकलियाँ। घोर घटा में, कड़क रहीं थी, दामिनियाँ। हाथ हाथ को, भी नहिं सूझे, तम गहरा। दरवाजों पर, लटके ताले, था पहरा।। यमुना मैया, भी ऐसे में, उफन पड़ी। विपदाओं की, एक साथ में, घोर घड़ी। मास भाद्रपद, कृष्ण पक्ष की, तिथि अठिया। कारा-गृह […]

फूल बन कर मुस्कराना जिंदगी है। मुस्कारा के गम भूलाना जिन्दगी है। मिलकर लोग खुश होते है तो क्या हुआ l बिना मिले दोस्ती निभाना भी जिंदगी है l। जिंदगी जिंदा दिलों की आस होती है। मुर्दा दिल क्या खाक जीते है जिंदगी। मिलना बिछुड़ जाना तो लगा रहता है […]

हरियाली देती सबको संदेश, पेड़-पौधे लगाओ, स्वर्ग बने देश ।। उद्योगों की आंधी में, विनाश रूपी विकास में, मत क्षति पहुंचाओ प्रकृति को- सभ्य समाजी बनकर पर्यावरण बचाओ । पेड़ लगाओ- पेड़ लगाओ, फोटो मत खिंचवाओ ।। हम बदलेंगे तो तस्वीर बदलेगी धरा की – प्रकृति का संरक्षण करके, ओजोन […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।