1.हिंदी को मान दिलाना होगा नाद ब्रह्म है, शब्द ब्रह्म है, अखिल विश्व में आत्म ब्रह्म है। वाणी है प्रतिबिम्ब हृदय का हवन कुंड जलाना होगा। वाणी का सामर्थ्य बढ़ाकर राष्ट्र को सबल बनाना होगा।। एक देश हो, एक धर्म हो, जन-जन का बस एक लक्ष्य हो। भाषाई वैमनस्य भुलाकर […]
काव्यभाषा
काव्यभाषा
शिव शक्ति रूप प्रगटी है माँ सिंहारूढ़ हैं शस्त्र सुसज्जित त्रिदेवों की ऊर्जा से अवतारी देवों के हित महिषासुर संहारी माँ सुहागिन पार्वती रूप धरे स्वर्णिम केसरी वस्त्र धारित है सूर्याभा करती प्रसारित सदा शांतिदायक कल्याणकारी माँ मस्तक पर चन्द्रघण्टा अंकित घन्टाध्वनि कर देती है भयमुक्त सदा सुखकारी मोक्षकारी माँ […]
हे शैलपुत्री! हे ब्रह्मचारिणी! माँ चंद्रघण्टे ! माँ कुष्मांडा! हे स्कन्दमाता! हे माँ कात्यायनी! हे कालरात्रि माँ! माँ महागौरी! माँ सिद्धिदात्री! माँ, तुम हो दुर्गे। तुम तपस्विनी, तुम विष्णुमाया, तुम भव्या, तुम बहुल प्रिया। चंडमुंड, खड़ग, खप्पर धारिणी, अष्ट भुज कल्याणकारिणी। तुम भवप्रिता, तुम भवमोचिनी, तुम बगलामुखी, तुम दक्ष कन्या। […]
