आशिक जब माशूका का शौहर बन जाएगा, इश्क का मीठा गुड़ यारों गोबर बन जाएगा। कहलाएगा बॉस शहर में,पर अपने घर में, बेगम का ताबेदार वो नौकर बन जाएगा। रोएगा दिल में,हँस के दिखलाए महफ़िल में, अपने ही घर सर्कस का जोकर बन जाएगा। आया तो बन चुका,वो बच्चों को […]
काव्यभाषा
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