जीवन के क्षण,कभी हर्षित कभी बोझिल, कभी तेज उजाला, कभी तारों की झिलमिल। कभी खुशियों का खजाना, कभी ग़म में गाफिल, कभी हर ओर सन्नाटा, कभी शोरगुल शामिल। कभी अभाव,तंगहाली, कभी हासिल ही हासिल, कभी हर ओर अपने, कभी लगते सभी कातिल। कभी शाम-ए-तन्हाई, कभी शाम-ए- महफिल, कभी हर दिल […]
निर्मलकुमार पाटोदी….. वैश्विक नगरी को हिन्दी अखरी….आज के बिजनेस स्टैंडर्ड में विश्लेषणात्मक रिपोर्ट पढ़कर विचार आया कि,हिन्दी-कन्नड़ को लेकर जो दु:खद भाषाई विवाद उभरा है,उसका नेतृत्व करने वालों की भाषाई समझ भटकी हुई थी। पूरी रिपोर्ट का विश्लेषण भी ठीक दिशा में नहीं है। रिपोर्ट के साथ चित्र में जो साइन बोर्ड […]
