साहित्य में क्षेत्रीय बोलियों का बोलबाला न हो तो वह नीरस सा हो जाता है | जी हाँ मैं आँचलिक भाषा के महत्व व विकास की ओर आप सभी का ध्यानाकर्षण चाहूँगा | मेरे पुरोधा आ० शिवपूजन सहाय जी ने पहली बार देहाती दुनिया लिख कर आँचलिक उपन्यासकारों की कतार […]

एक विद्यालय सिर्फ किसी भवन की चारदिवारी को नहीं कहा जा सकता,सिर्फ शिक्षक और भौतिक वस्तुओं का होना भी विद्यालय की परिकल्पना को साबित नहीं करता है,विद्यालय का मूल केन्द्र बिंदु है उसके विद्यार्थी और उनकी संख्याl साथ ही उनकी उपस्थिति वो भी कितने समय तक क्योंकि,जब विद्यार्थी अपनी कक्षा(शाला) […]

बात और यहसास को समझे नहीं वो, इशारों के जज्बात को समझे नहीं वो। यूँ ही तो दूर-दूर होने को लगे बेवजह, लबों की मुस्कुराहट को समझे नहीं वो। कोई अपना भी दूर जाता है कभी भी, दूर से पास के हालत को समझे नहीं वो। सफर ये जो अब […]

गिरकर उठना,उठकर चलना, यह काम है संसार का। कर्मवीर को फर्क न पड़ता, कभी जीत और हार का॥ जो भी होता है घटनाक्रम, रचता स्वयं विधाता है। आज लगे जो दंड वही, पुरस्कार बन जाता हैं॥ निश्चित होगा प्रबल समर्थन, अपने सत्य विचार का। कर्मवीर को फर्क न पड़ता, कभी […]

सपनों का संसार बसाया, हमने तेरी बातों पर… तुझको ही घरबार बनाया, हमने तेरी बातों पर…l    पर न जाने क्या तेरे मन में, जो न आया तू जीवन में… तुझको ही दरबार बनाया, हमने तेरी बातों पर…l    संग चलने के कसमे-वादे, तेरे ऐसे-कैसे ये नेक इरादे… तुझको ही […]

भाव रूठे,गीत फिर कैसे सुनाऊँ, तार बिखरे वीणा के कैसे बजाऊँ। बाँध पाया कौन मन को, थाह पाया कौन मन को आह में डूबी व्यथा को, कैसे बताऊँ। भाव रुठे गीत…॥ नयन गीले प्राण रीते, विवशता में अधर सीते और कब तक हृदय को, धीरज बंधाऊँ। भाव रुठे गीत…॥ शून्यता […]

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।