राष्ट्रकवि दिनकर आधुनिक युग के दिनकर, साहित्य जगत में पहचान अमिट रस वीर | कवि दिनकर हिंदी के कलम सम्राट – देकर जन्म धन्य-धन्य हुई धरा बिहार || रेणुका, उर्वशी, हुंकार, रश्मिरथी क्रतियाँ महान, सदा रखा हृदय में, माँ भारती के प्रति मान | ओजस्वी राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रचीं रचनाएँ […]

मन से भक्ति करने वाले तुम्हे प्रभु मिल जायेंगे। दानधर्म करने वालो को दौलत भी मिल जायेगी। मन से भक्ति करने वाले तुम्हें प्रभु मिल जायेंगे।। होगा ये सब सामाने तेरे तू सब कुछ यही देखेगा। प्रभु की लीला देखकर तू प्रभु चरणो में खो जायेगा। आसमान में उड़ने वालो […]

भारतीय साहित्य की अग्रहणि साहित्यिक ‘राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्था’ (रजि-HR06D0004086) की छं वी स्थापना दिवस मनाया गया! इस संस्था की स्थापना 3 जनवरी 2016 को हुई थी तब से साहित्य की ओर अग्रसर है ! दिन-दूना , रात- चौगुना सफलता की सीढ़ी चढ़ रही है ! इस संस्था की स्थापना […]

दर्द की रात हो या, सुख का सवेरा हो…। सब गंवारा है मुझे, साथ बस तेरा हो…। प्यार कोई चीज नहीं, जो खरीदा जा सके। ये तो दिलो का, दिलो से मिलन है।। प्यार कोई मुकद्दर नहीं, जिसे तक़दीर पे छोड़ा जाए। प्यार यकीन है भरोसा है, जो हर किसी […]

म्हारे देश में आपणी-आपणी कहानी सुणावै सै अर अपने रोले-रोवै सै मेरे ढब्बी ब्होत घणे थे उन में तै एक मेरा घणा प्यारा ढस्बी जो आज मेरे बीच में ना सै जो कदे भी लौटे कोनी आवै उसका कै नाम, सै उसका मेरे साहसी नाम ना लेवो वो तो मेरे […]

हम मेहनतकश मजदूरों से जब कोई लुक्मा छीनेगा हो जितने ऊंचे आसन पर वो अपना ओहदा छीनेगा वह जमा हुआ जो आसन है जो सत्ता और सिंहासन है जो केवल थोता भाषण है जो रोके रस्ता शासन है हम बढे चलेंगे दिल्ली तक क्या मेरा रास्ता छीनेगा यह बेघर करने […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।