
चतुर्भुजदास माधुर्यभाव के कवि रहे
इन्दौर। श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति में मंगलवार को आयोजित कालजयी साहित्यकार स्मरण शृंखला में अष्टछाप के कवि चतुर्भुजदास का स्मरण किया गया।
कार्यक्रम में कवि परिचय साहित्य मंत्री डॉ. पद्मा सिंह ने दिया। उन्होंने बताया कि कुम्भनदास के पुत्र और सखा भाव से कृष्ण का स्मरण करके पदों की रचना करते रहे।
वक्तव्य में डॉ. अखिलेश राव ने बताया कि ‘चतुर्भुजदास ने जीवन कृष्णभक्ति में लीन कर जीवन का आनंद लिया। अष्टछाप के कवि ने जन्म से प्रभु भक्ति का लाभ लिया।
डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने कहा कि ‘गुसाईं विट्ठलनाथ के शिष्य चतुर्भुजदास अष्टछाप के माधुर्यभाव के कवि रहे, उन्होंने महज़ 41 दिन की आयु में ‘सेवक की सुखराशी सदा, श्री वल्लभ राजकुमार’ पद लिखा। उनकी भक्ति के वश में श्रीनाथ जी रहे।’
सुधा चौहान ने कहा कि ‘भक्त भगवान से बड़ा होता है, यही चतुर्भुज दास ने सिखाया।’
राधिका इंगले ने अपने वक्तव्य में कहा कि ‘श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण भाव रखने वाले चतुर्भुज दास रहे।’
इस अवसर पर डॉ. प्रतिभा सोलंकी, मनोरमा जैन, अभियन्ता श्यामसिंह, जितेन्द्र मानव ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम संचालन डॉ. पद्मा सिंह ने व आभार किशोर यादव ने व्यक्त किया।
इस मौके पर त्रिकोटकर, ज्योति यादव, महेश लोदवाल, नयन राठी आदि मौजूद रहे।

