देख किसान की हालत को मोरो मन बहुत दुख रऔ है। काय चुनी ऐसी सरकारखो जिसखो किसानो का दर्द दिखत नाईयै।। कभाऊ खेत में हल न चलाओ। तो क्या जाने खेती और किसानो को हाल। कैसे खेत जोते जाते हैं नेता क्या जाने खेतो को हाल। बैठ वतालुकूल हालो में […]

आपको बता दें अवधेश जी फतेहाबाद क्षेत्र के एक उभरते युवा साहित्यकार हैं | इनकी रचनाएं देशभर की तमाम साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में पढ़ी, देेखीं जा सकती हैं | इसके साथ ही इनके संपादन में स्मारिका युवा – धड़कन का प्रकाशन सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है | कृषक परिवार में जन्मे […]

स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। ज़रा रुककर सोचिए…। क्या हो रहा है…? इसके पीछे का मकसद क्या है…? यह क्रूरता आखिर क्या चाहती है…? इनको संरक्षण कौन दे रहा है…? इसके पीछे कौन लोग हैं…? यह फंडिग कहाँ से आ रही है…? ऐसे बहुतेरे सवाल हैं जिसका जवाब तो सरलता […]

भक्ति में अंध श्रद्धा करते प्रार्थना करते हम अनूठी खुद को मूर्ख,खल,कामी कहते बात भले ही हो सब झूठी परमात्मा की सन्तान है हम गलत कैसे हो सकते है हम गलती अगर हो गई हमसे प्रायश्चित करे हम उसका छोड़ दे सब बदी बुराई सदाचरण करे जीवन का स्वयं को […]

खोयी हुई आत्मा टटोल रही है मर्म खाली पड़ी हुई कविता के जिस्म में जाने हेतु जहाँ पर श्रृंगार, वीर ,करुणा तमाम रस आतुर हो यमक,श्लेष,अलंकार से मिलने के लिए। इन सबसे तैयार कविता निकली हो, किसी हिम,समुद्र की गहराइयों में गोते लगाने हेतु किसी प्रेमिका की नथनी बन तो […]

सारे देश को जो अन्य देता खुद लेकिन भूखा सोता। फिर भी किसी से कुछ कभी नहीं वो कहता। क्या हालत कर दी उनकी देश की सरकार ने। कठ पुतली सरकार बन बैठी देश के पूंजीपतियों की। तभी उसे समझ न आ रही तकलीफे खेतिहर किसानो की।। सारे देश को […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।