जब मिले किसी से नजरे जब मिले किसी से दिल। समझो की प्यार तुम्हें अब होने लगा है।। जिंदगी की दास्तान चाहे कितनी हो हसीन। बिन तुम्हारे कुछ नहीं बिन तुम्हारे कुछ नहीं। एक साथ की जरूरत हर किसी को होती है। है अगर वो नर तो चाहिए एक मादा […]

शरीर को चंगा रखो। दिमाग को ठंडा रखो।। जेब को गर्म रखो। आंखो मे शर्म रखो।। जबान को नरम रखो। दिल में रहम रखो।। क्रोध पर लगाम रखो। सबसे ही प्रणाम रखो।। अपने को मस्त रखो। किसी को न त्रस्त रखो।। अपने को व्यस्त रखो। भजन में मस्त रखो।। मुख […]

श्रम के भाग्य निवेश,प्यारे भारत देश इसके लिए अंग्रेजी सरकार ने उन्हें कोप भाजक भी बनाया। वे सच्चे देश प्रेमी थे। 1921 -22 के असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए कई बार जेल भी गए। इनकी कविताओं में देश प्रेम के साथ पकृति और प्रेम का भी […]

राम सबको प्रिय रहें ऐसा चुने हम मार्ग मर्यादा की रक्षा करें करे राम का ध्यान मन वचन कर्म से बने हम सत्यानुगामी राम चरित्र सबसे बड़ा हो उनके हम अनुगामी मन्दिरो में भी रहे राम चौराहों पर भी हो राम प्रेरक है राम का नाम राम सभी को भाता […]

लेखक खान मनजीत भावड़िया मजीद खान मनजीत भावड़िया मजीद कि तीसरी किताब “बिराण माट्टी” नाटक संग्रह के रूप में आया है बहुत ही अच्छा प्रयास किया इसमें नाटक है जो समाज में फैली हुई कुरितियां को दर्शाने का प्रयास किया है इसमें लोक-परंपराओं, लोक-विश्वासों तथा लोक-भावनाओं के जितने विविध रूप […]

जीवन की आपाधापी में लोगों ने समस्याओं का अम्बार लगा लिया है। शारीरिक सुख और थोथे सम्मान की चाहत में भौतिक वस्तुओं की भीड में निवास स्थान एक अजायबघर बनकर रह गया है। यही अजायबघर विभिन्न समस्याओं का कारक बनता जा रहा है। कभी एसी खराब तो कभी कार खराब। […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।