मै धरति पुत्र हु अपने दम पर जीता हु 

rajesh Bhandari
मै धरति पुत्र हु और इस धरा पर अपने दम पर जीता हु ,
चीर  के सीना अपने खेतो का अपना हिस्सा लेता हु ,
जब तुम सोते हो गहन निद्रा में शीतल शीतल कमरों में ,
जब तुम होते हो माल और रेस्टारेंटो के शहरो में ,
तब में चिल चिलाती धुप में खेतो को पानी देता हु ,
मै धरति  पुत्र हु और इस धरा पर अपने दम पर जीता हु,
चीर के सीना अपने खेतो का अपना हिस्सा लेता हु |
जब तुम धारण करते हो महंगे महंगे सूट बूट और साड़िया,
खाते हो रेस्तारेंटो में महंगा खाना और घुमाते हो गाडिया ,
तब में फटे हुए कुर्ते में सर पर गोबर का टोकना ढोता हु ,
मै धरति  पुत्र हु और इस धरा पर अपने दम पर जीता हु,
चीर  के सीना अपने खेतो का अपना हिस्सा लेता हु |
मै अन्नदाता हु इस देश का मेरा कुछ तो सम्मान करो ,
मजदूरो से बदतर हे जीवन,स्वाभिमान का तो मान करो,
मेरी फसलो से व्यापारी और सरकारों के वारे न्यारे हे,
मेरी बदहाली और गरीबी पर संवेदना हिन ये सारे हे,
अपनी फसलो के वाजिब दाम का आवेदन में देता हु,
मै धरति पुत्र हु और इस धरा पर अपने दम पर जीता हु,
चीर  के सीना अपने खेतो का अपना हिस्सा लेता हु ,
ये मेरी कमजोरी हे में राजनीति नहीं जानता हु ,
मै भोला भाला किसान सबको अपना मानता हु ,
जो मीठी मीठी बात करे उसके झासे में आ जाता हु ,
राजनीति के इस दल दल में अपने को ठगा सा पता हु,
करोडो का खाद्यान्न हडतालो को दे आता हु ,
बदले में पुलिस से लाठी पीठ पर खाता हु ,
मै धरति पुत्र हु और इस धरा पर अपने दम पर जीता हु,
चीर के सीना अपने खेतो का अपना हिस्सा लेता हु |

#राजेश भंडारी “बाबू”

इंदौर(मध्यप्रदेश)

matruadmin

Next Post

आतंक के साये में लक्ष्यहीन लोकतंत्र

Mon Jun 4 , 2018
विश्व के प्रतिष्ठित लोकतांत्रिक देशों में से एक आर्यावर्त ( भारत ) वर्तमान में दिशाविहीन सा प्रतीत होता है क्योंकि शक्तिशाली गणतंत्र के समक्ष अनेकानेक चुनौतियां हैं एवं हम अपनी विक्षिप्त मानसिकता और संकीर्ण कट्टरपंथी विचारधारा के कारण विश्व परिदृश्य से अपनी पहचान खोते जा रहे हैं । देश की […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।