रिश्ते बनाकर चलिए…

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pavan

नफरतों की आंधियां है, रिश्ते बनाकर चलिए,
दुश्मनों की कमी नहीं,दोस्त बनाकर चलिए।

सब कुछ बिक रहा है झूठ के इस बाजार में,
अपने ईमान को जरा-सा संभालकर चलिए।

कांटों से भरा सफर है दामन बचाकर चलिए,
सियासतों का शहर है बोली लगाकर चलिए।

अब ये दौर नहीं बचा सवाल करने वालों का,
अपनी जुबाँ को अपने मुँह में दबाकर चलिए।

                                                                   #पवन गुर्जर

परिचय :  पवन गुर्जर इंदौर निवासी हैं और वर्तमान में दैनिक समाचार-पत्र में मार्केटिंग विभाग में कार्यरत हैं। लेखन शौक से करते हैं। शायरी-कविताएं लिखना आपको पसंद है। समय- समय पर त्वरित मुद्दों पर भी लिखते रहते हैं।

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matruadmin

One thought on “रिश्ते बनाकर चलिए…

  1. नफरतों की आंधियां है, रिश्ते बनाकर चलिए,
    दुश्मनों की कमी नहीं,दोस्त बनाकर चलिए।

    अब ये दौर नहीं बचा सवाल करने वालों का,
    अपनी जुबाँ को अपने मुँह में दबाकर चलिए।

    बढिया

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।