sarita singhai
तन्हा तन्हा रहती हूँ मैं
अपनी मौज में बहती हूँ मैं
तुम क्या जानो खंड़हर जैसी
जर्रा जर्रा ढ़हती हूँ मैं
निर्मल जल हिमगिरि से लेकर
कलकल कलकल बहती हूँ मैं
बिन बोली कितनी हैं बातें
फिर भी चुप चुप कहती हूँ मैं
मैं ठहरी गंगा सी सरिता
बोझ पाप का सहती हूँ मैं
        #सरिता सिंघई ‘कोहिनूर’ 
परिचय : श्रीमति सरिता सिंघई का उपनाम ‘कोहिनूर’ है। आपका उद्देश्य माँ शारदा की सेवा के ज़रिए राष्ट्र जन में चेतना का प्रसार करना है।उपलब्धि यही है कि,राष्ट्रीय मंच से काव्यपाठ किया है। शिक्षा एम.ए.(राजनीति शास्त्र) है। वर्तमान में मध्यप्रदेश के वारासिवनी बालाघाट में निवास है। जन्म स्थान नरसिंहपुर है। गीत,गज़ल,गीतिका,मुक्तक,दोहा,रोला,सोरठा,रुबाई,सवैया,चौपाईयाँ,कुंडलियाँ ,समस्त छंद,हाइकू,महिया सहित कहानी ,लेख,संस्मरण आदि लगभग समस्त साहित्य विद्या में आप लिखती हैं और कई प्रकाशित भी हैं। आपकी रूचि गायन के साथ ही लेखन,राजनीति, समाजसेवा, वाहन चालन,दुनिया को हंसाना,जी भर के खुद जीना,भारत में चल रही कुव्यवस्थाओं के प्रति चिंतन कर सार्थक दिशा देने में है। पूर्व पार्षद होने के नाते अब भी भाजापा में नगर मंत्री पद पर सक्रिय हैं। अन्य सामाजिक और साहित्यिक संगठनों से भी जुड़ी हुई हैं।

About the author

(Visited 88 times, 1 visits today)
Please follow and like us:
0
http://matrubhashaa.com/wp-content/uploads/2017/08/sarita-singhai.pnghttp://matrubhashaa.com/wp-content/uploads/2017/08/sarita-singhai-150x150.pngArpan JainUncategorizedकाव्यभाषाamar singh,girendr sinh,kohinoor,saritaतन्हा तन्हा रहती हूँ मैं अपनी मौज में बहती हूँ मैं तुम क्या जानो खंड़हर जैसी जर्रा जर्रा ढ़हती हूँ मैं निर्मल जल हिमगिरि से लेकर कलकल कलकल बहती हूँ मैं बिन बोली कितनी हैं बातें फिर भी चुप चुप कहती हूँ मैं मैं ठहरी गंगा सी सरिता बोझ पाप का सहती हूँ मैं         #सरिता...Vaicharik mahakumbh
Custom Text