keshav
आज के भगवान,
हैं हमारे किसान।
पसीना बहाकर,
अन्न उपजाकर।
खुद कष्ट सहकर,
हमें जीवन देते हैं।
बदले में होती है,
उनकी बेइज्जती।
ऋण से दबकर,
करते आत्महत्या।
इसके प्रति हमसभी,
और हमारी सरकार,
सौ आने है जिम्मेदार,
और है गुनाहगार भी।
सोचो किसान न हों,
किसान खेती न करें।
फिर हम क्या खाएंगे,
जीते जी मर जाएंगे।
अभी भी बचा है समय,
नही तो मरेंगे असमय।
अब हम सभी मिलकर,
करें किसानों का सम्मान,
उन्हें दिलाएँ उचित दाम।
क्योंकि किसान बचेंगे,
तभी तो किसानी होगी,
जब किसानी होगी,
तभी अन्न उपजेगी,
जब अन्न उपजेगी,
तभी जीवन बचेगी।
क्योंकि?
जीवन और किसान,
दोनों ही अनमोल हैं,
दोनों के बहुमूल्य हैं।।(इति)।।

           #केशव कुमार मिश्रा

परिचय: युवा कवि केशव के रुप में केशव कुमार मिश्रा बिहार के सिंगिया गोठ(जिला मधुबनी)में रहते हैं। आपका दरभंगा में अस्थाई निवास है। आप पेशे से अधिवक्ता हैं।

About the author

(Visited 1 times, 1 visits today)
Please follow and like us:
0
Custom Text