pramod sonvani
करके जल्दी से तैयारी,
शाला पढ़नें जायेंगे ।
चित्र बनें हैं जहाँ मनोहर,
मन अपना बहलायेंगे ।।
पुस्तक-काँपी लेकर झटपट,
सीधे शाला जाना है ।
ध्यान लगाकर सच्चे मन से,
सबक हमें तो पढ़ना है ।।
कितना अच्छा मिलता भोजन,
देखो तो शाला जाकर ।
खेल-कूद भी तरह-तरह के,
देखो तो शाला जाकर ।।
                # डॉ. प्रमोद सोनवानी “पुष्प”

About the author

(Visited 25 times, 1 visits today)
Please follow and like us:
0
http://matrubhashaa.com/wp-content/uploads/2018/04/pramod-sonvani.pnghttp://matrubhashaa.com/wp-content/uploads/2018/04/pramod-sonvani-150x150.pngArpan JainUncategorizedकाव्यभाषाpramod,sonvaniकरके जल्दी से तैयारी, शाला पढ़नें जायेंगे । चित्र बनें हैं जहाँ मनोहर, मन अपना बहलायेंगे ।। पुस्तक-काँपी लेकर झटपट, सीधे शाला जाना है । ध्यान लगाकर सच्चे मन से, सबक हमें तो पढ़ना है ।। कितना अच्छा मिलता भोजन, देखो तो शाला जाकर । खेल-कूद भी तरह-तरह के, देखो तो शाला जाकर ।।              ...Vaicharik mahakumbh
Custom Text