जिंदगी सस्ती हो गई..

3
Read Time0Seconds

naroliya

नेताओं की जिंदगी, जबसे मस्त हो गई ,
चीजें बहुत महंगी, जिंदगी सस्ती हो गई।

कहता था जो मसीहा,लाएगा अच्छे दिन,
विदेश यात्रा पूरी उसकी एक साल हो गई।

खुलेआम घूमते हैं बदमाश,इस शहर में,
बस्ती अब शरीफों की सुनसान हो गई।

शहीद पर न बहे होंगे,नेताओं के इतने आंसू,
किसान की मौत पर जितनी नौटंकी हो गई।

कहां से आएगी,उस बाप की आंखों में नींद,
जिसकी मासूम बच्ची आज भी भूखी सो गई।

परिचय : इंदौर(मध्यप्रदेश) के परदेशीपुरा क्षेत्र में रविंद्र नारोलिया रहते हैं। आपका व्यवसाय ग्राफिक्स का है और दैनिक अखबार में भी ग्राफिक्स डिज़ाइनर के रुप में ही कार्यरत हैं। 1971 में जन्मे रविंद्र जी कॊ लेखन के गुण विरासत में मिले हैं,क्योंकि पिता (स्व.)पन्नालाल नारोलिया प्रसिद्ध कथाकार रहे हैं। आप रिश्तों और मौजूदा हालातों पर अच्छी कलम चलाते हैं।

0 0

matruadmin

3 thoughts on “जिंदगी सस्ती हो गई..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

'ऋतु-बसंत'

Wed Feb 15 , 2017
रंगों में रंगने मौसम के सजने, इजहारे ईश्क… ऋतु बसंत आई है..। लम्हों को जीने लहरों के बहने, इंतजारे आशिक… सुहानी बसंत आई है..। चाहतों में संवरने साँसों को महकाने, दिले दुश्मन… बहारे बसंत छाई है..। मोहब्बत में चहकने प्यार में रमने, दिले इकरार… सुगंधी ऋतु लाई है..। प्रेम बरसाने […]

You May Like

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।