जो सत्ता में बैठा है, उसका गरूर लाजमी है, खुदा नहीं है वो मगर, थोड़ा सरूर लाजमी है। नादां है वो, जो खुद को बादशाह समझता है, चुनें न जो हम उसे, उसकी फकीरी लाजमी है। हम बहुत कमजोर हैं, ये तो मालूम है हमें, कह दो उससे,उसका डरना जरूर […]

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प्रायः यह देखा गया है कि,आज की युवा पीढ़ी जिन्दगी को जीना नहीं चाहती,बल्कि उड़ना चाहती है। पा लेना चाहती है सबकुछ, कुछ ही पलों में। धैर्य,शान्ति,सबर जैसे शब्द तो जैसे उनकी जिन्दगी में ज्यादा मायने ही नहीं रखते। ऐसे हालातों में संवाद ही एक ऐसा जरिया है,जिससे युवा पीढ़ी […]

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हर दर्दे दिल की दवा नहीं होती, टूटता है कुछ यूं भी के सदा नहीं होती। खरीद पाता गुड़िया जो वो उस दुकान से, रात भर उसकी बेटी यूं रोई नहीं होती । उठाता क्यों बूढ़ा रोटी उस कूड़े से, आग जो भूख ने लगाई नहीं होती। लुटाती नहीं जो […]

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वह जिन्दगी में आए उतार-चढ़ाव के थपेड़ों और बढ़ती महंगाई में परिवार के बोझ को सह नहीं पा रहा था। आए दिन उसके जहन में आत्महत्या करने का विचार कोंध जाता,मगर फिर परिवार की जिम्मेदारी और बच्चों के भविष्य के लिए वह हिम्मत जुटाकर जिन्दगी को आगे बढ़ाता चला गया। […]

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जोकर, एक असाधारण व्यक्तित्व का.. साधारण-सा नाम, शायद इसीलिए आसान नहीं होता.. जोकर हो पाना, वैसे कोई चाहता भी नहीं जोकर बनना, जोकर कहलाना, क्यूंकि, हर कोई चाहता है खिलखिलाना-मुस्कुराना.. पर दूसरों पर, खुद पर हँसने और खुद पर हंसाने का माद्दा हर किसी में नहीं होता और जिसमें होता […]

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जो शख्स इस गुमां में भटकता रहा ताउम्र, जज्ब अपनी मुट्ठी में सारे जहां को करूंगा मैं.. होकर रूखसत जहां से गया जब खाक-ए-कब्र में, हथेली में उसके चंद लकीरों के सिवा कुछ न था। —– तेरे लिए मेरे दिल में चाहत हो ऐसे, मोती के लिए तरसती हो सीप […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।