प्रभु जी…तेरे खेल निराले 

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anupam
बूँद बने कब मोती…मुक्ता..कब गज भाल सजा ले,
कब कोई क्या खो दे जग में..कब कोई क्या पा ले।
प्रभु जी…तेरे  खेल  निराले…॥
कब हो जाए…रंगभवन में..दुख का  करुणित क्रंदन,
कब जल जाए शव के संग-संग…पावन सुरभित चंदन।
कब माया छलिया बन जाए…कब वह भाग्य संभाले,
प्रभु जी…तेरे खेल निराले…॥
यह जग है…कर्मों का फेरा..करनी के संग भरनी,
कब किस्मत दे प्रणय,और..कब..भर दे रंग विरहनी।
कब आँखें गंगा बन जाए…कब नव स्वप्न खंगाले,
प्रभु जी…तेरे खेल निराले…॥
हानि-लाभ का…मोह..त्याग कर..कर्म भूमि में आओ,
हरि चरणों में…लगन लगाओ..मन को मत भरमाओ।
ढाई अक्षर पढ़कर केवल…जीवन सफल बना ले,
प्रभु जी..तेरे खेल निराले…॥

          #अनुपम कुमार सिंह ‘अनुपम आलोक’

परिचय : साहित्य सृजन व पत्रकारिता में बेहद रुचि रखने वाले अनुपम कुमार सिंह यानि ‘अनुपम आलोक’ इस धरती पर १९६१ में आए हैं। जनपद उन्नाव (उ.प्र.)के मो0 चौधराना निवासी श्री सिंह ने रेफ्रीजेशन टेक्नालाजी में डिप्लोमा की शिक्षा ली है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।